30-35 की उम्र में बांझपन की दर तो बढ़ ही रही है। अब मोटापे से भी सही उम्र में मां बनने में दिक्कत आ रही है। डॉक्टर मानते हैं कि मोटापे से हार्मोंस गड़बड़ाने से 20-30 साल की 22 फीसदी महिलाओं को गर्भधारण करने में समस्याएं आ रही हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग के अध्ययन के मुताबिक इनमें से अत्यधिक मोटापे की शिकार तीन फीसदी महिलाओं में बांझपन का खतरा है।
एसएन के स्त्री रोग विभाग की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रुचिका गर्ग ने बताया कि ओपीडी में 20-30 साल की करीब 450 शादीशुदा महिलाओं पर अध्ययन किया गया। इनमें से 70 फीसदी महिलाएं मोटापे की शिकार थीं। इनकी कमर की नाप 80 सेमी (नाभि से नीचे) से अधिक थी। इनमें से 22 फीसदी को गर्भधारण करने और गर्भ ठहरने में दिक्कत आ रही थी।
दरअसल, मोटापे से लेप्टिन हार्मोंस प्रभावित होता है। इससे अंडाणु उत्पादन और प्रजनन क्षमता कम होने लगती है। 15 फीसदी की कमर तो 100 सेमी तक थी। इनमें से 3 फीसदी में बांझपन का खतरा दिखा। मोटापे के लिए सबसे ज्यादा फास्ट फूड, डिब्बा बंद भोजन, व्यायाम-घरेलू कार्यों से दूरी बड़ी वजह मिली। फास्ट फूड में मिलने वाले रासायनिक तत्वों से एस्ट्रोजन हार्मोंस टेस्टोस्टेेरोन हार्माेन में भी बदलने लगता है। इससे 8 फीसदी महिलाओं में हल्की दाढ़ी-मूंछ उभरने की भी समस्या मिली। इनको दवा देने के साथ वजन कम करने पर भी जोर दे रहे हैं।