सूरसदन में शनिवार को जैन समाज के बाल कलाकारों ने नृत्य, गीत और नाट्य प्रस्तुतियां देकर भगवान महावीर के सिद्धांतों पर अमल करने की सीख दी। इससे पूर्व धर्मसभा में साध्वी आचार्य चंदना जी ने भगवान महावीर के जीओ और जीने दो के संदेश को विश्व शांति के लिए जरूरी बताया।
एसएस जैन ट्रस्ट, मोतीकटरा के कार्यक्रम में वंश सकलेचा, वेदांश सुराना, कश्वी सुराना और स्पर्श ने गिटार के साथ ‘ओ पालनहारे, निर्गुण और न्यारे’ की प्रस्तुति दी। बालिकाओं ने ‘मैं शुक्र मनावा जी, जो दर तेरा पाया जी’ पर नृत्य, युवतियों ने ‘रंग मा रंगा रे, आदि पर नाट्य प्रस्तुतियां दीं। बच्चों ने भगवान महावीर के अनेकांत के सिद्धांत पर आधारित नाट्य प्रस्तुति में सभी धर्मों के अनुयायियों के बीच आपसी सौहार्द का संदेश दिया।
आचार्य श्री चंदना जी ने कहा कि वीरायतन (विहार) का विचार सर्वप्रथम वर्ष 1970 में राष्ट्र संत अमर मुनि जी महाराज ने ही आगरा की धरती से दिया था। श्वेतांबर जैन संघ के अध्यक्ष अशोक जैन सीए ने जैन समाज से आचार्य श्री को पद्मविभूषण से अंलकृत कराने के लिए प्रयास करने कर आह्वान किया। वीरायतन उपाध्यक्ष अशोक जैन ओसवाल ने कहा कि आचार्य मां के सपने साकार करने को आगरा में भी वीरायतन की स्थापना की जाएगी। अध्यक्ष सुमेरचंद जैन, संरक्षक प्रेमचंद जैन, राकेश जैन सीए, सुशील जैन, सुलेखा सुराना, सुमित्रा सुराना ने भी विचार व्यक्त किए। साध्वी मंडल में साध्वी डा. चेतना, साध्वी श्रुति जी, साध्वी संघमित्रा मौजूद रहीं। सांस्कृतिक प्रस्तुतियां वृथा भंडारी व संगीता सकलेचा के निर्देशन में हुईं। महेंद्र जैन, संदेश जैन, संजीव सिंह चौहरा, सुरेश सुराना, सोहनलाल जैन, रतनचंद लोकड़, मुकेश चपलावत आदि मौजूद रहे।