फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब आंधी नहीं तो भी बढ़ा ताज पर प्रदूषण

Thu, 29 Jan 2015 02:05 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
विज्ञापन
विज्ञापन
दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारत में शुमार ताजमहल पर तमाम दावों के बावजूद प्रदूषण नियंत्रित नहीं हो पा रहा है। गर्मियों में आंधी से धूल की समस्या रहती है। चौंकाने वाली बात यह है कि सर्दियों में और ज्यादा मात्रा में धूल के कण संगमरमर के पत्थरों पर रगड़ रहे हैं। वर्ष 2013 की अपेक्षा पिछले वर्ष दिसंबर में प्रदूषण बढ़ा है। यह मई-जून के मौसम से भी अधिक है।
विज्ञापन

ताजमहल को प्रदूषण से मुक्त रखने के लिए शहर से फाउंड्री उद्योग तक खत्म कर दिया, पांच सौ मीटर दायरे में वाहनों पर भी प्रतिबंध लगा दिया। लेकिन स्मारक के आस-पास के वायुमंडल में सुधार न हुआ। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2014 में 2013 की अपेक्षा ताज पर प्रदूषण बढ़ा है। आरएसपीएम (रेसक्रेटरी सस्पेेंडेड पार्टिकुलेट मैटर) के साथ एसपीएम (सस्पेेंडेड पार्टिकुलेट मैटर) में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। बता दें कि मई-जून में आंधियां चलने से ताज पर काफी धूल बढ़ जाती है। सर्दियों में राहत मिलली चाहिए थी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। इसके उलट प्रदूषण और बढ़ गया। बता दें कि 28 जून 2014 को आरएसपीएम 131 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर था, वहीं एसपीएम 254 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर था। जो इसी साल दिसंबर महीने से कम है।
इनसेट
दिसंबर में ताजमहल पर प्रदूषण की स्थिति
वर्ष     आरएसपीएम      एसपीएम
2014        248        357
2013        177        303
नोट: सभी आंकड़े माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर में हैं।
इनसेट
हरियाली पर उठे सवाल
प्रदूषण बढ़ने के इन आंकड़ों ने स्मारक के आसपास हरियाली की स्थिति की पोल खोल दी है। कागजों में भले ही पेड़ लगाए जा रहे हों लेकिन हकीकत में हरियाली का असर नहीं नजर आ रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें