मैनपुरी। पंचायतों में घोटाले के मामले में की गई कार्रवाई का उच्च न्यायालय ने एक और आदेश निरस्त कर दिया है। प्रधान की अपील पर जिलाधिकारी के आदेश को उच्च न्यायालय ने निरस्त कर दोबारा नया आदेश पारित करने के लिए कहा है। हाल ही में इससे पहले भी एक पंचायत की अपील पर जिलाधिकारी का आदेश तीसरी बार निरस्त हुआ था।
मामला विकास खंड घिरोर की ग्राम पंचायत कल्होर पुवां का है। एक शिकायत पर हुई जांच में यहां 5.99 लाख रुपये का घोटाला मिला था। तीन सदस्यीय समिति की जांच रिपोर्ट पर मुख्य विकास अधिकारी ईशा प्रिया ने प्रधान के अधिकार सीज करने की संस्तुति की थी। इस पर जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह ने चार सितंबर को 2020 को प्रधान अजब सिंह के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारी सीज कर तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी थी।
जिलाधिकारी के आदेश को ग्राम प्रधान ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में चुनौती दी थी। इसमें कहा था कि प्रशासन ने उनके जवाब को नहीं सुना। इस पर उच्च न्यायालय ने जिलाधिकारी का आदेश निरस्त कर दिया। साथ ही दोबारा प्रधान को नोटिस जारी करने के साथ ही जवाब का परीक्षण करते हुए नया आदेश पारित करने के लिए लिखा है। ऐसे में एक बार फिर अजब सिंह को ग्राम प्रधान का कार्यभार सौंपा गया है। इससे पहले भी करहल की ग्राम पंचायत टिमरख में उच्च न्यायालय द्वारा तीन बार जिलाधिकारी का आदेश निरस्त किया जा चुका है।
ये था मामला
गांव कंजाहार निवासी श्यामकिशोर यादव ने ग्राम पंचायत में फर्जीवाड़ा किए जाने की शिकायत की थी। शिकायत पर तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी नगेंद्र शर्मा ने तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। इसमें आचार्य ग्राम्य विकास संस्थान धीरेंद्र कुमार, अपर जिला सहकारी अधिकारी सुरेश बाबू और अवर अभियंता आरईडी घिरोर ब्रजकिशोर को शामिल किया गया था। तीनों ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी को सौंपी थी।
सचिव हो चुका है निलंबित
इसी मामले में जिलाधिकारी ने प्रधान के अधिकार सीज करने के साथ ही पंचायत सचिव प्रदीप यादव पर प्रशासनिक कार्रवाई के आदेश दिए थे। आदेश पर जिला विकास अधिकारी पीके राय ने सचिव प्रदीप कुमार को बीते माह निलंबित कर दिया था।
उच्च न्यायालय ने कल्होर पुवां के प्रधान पर की गई कार्रवाई का आदेश निरस्त कर दिया है। अब दोबारा से न्यायालय के आदेशानुसार प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी।
स्वामीदीन, डीपीआरओ।