मैनपुरी। ग्राम पंचायत सचिवों के आगे अधिकारी और प्रशासन बेबस हो गया है। बारा-बार नोटिस देने के बाद भी पंचायत सचिवों ने विकास कार्यों के दस्तावेज जमा नहीं कराए। दस्तावेज न मिलने से प्रशासन के पास ग्राम पंचायतों में कराए गए विकास कार्यों का कोई रिकॉर्ड नहीं है।
जिले के नौ ब्लॉकों में कुल 552 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें हर साल अरबों रुपये की धनराशि से विकास कार्य कराए जाते हैं। नियमानुसार वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद पंचायत सचिव को पूरे साल में कराए गए कार्यों के सभी दस्तावेज ब्लॉक में जमा कराने होते हैं, लेकिन सचिवों ने दस्तावेज ही जमा नहीं कराए।
वित्तीय वर्ष समाप्त हुए तीन माह का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक ग्राम पंचायतों के दस्तावेज जमा नहीं कराए। बावजूद इसके प्रशासन भी उन पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। सूत्रों के अनुसार सचिव इसलिए अभिलेख उपलब्ध नहीं कराते हैं कि इससे उनके द्वारा विकास कार्यों में किए गए गड़बड़ की पोल खुल जाएगी।
बीते माह तत्कालीन सीडीओ ने जारी कराया था नोटिस
एक माह पूर्व तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी नगेंद्र शर्मा ने सचिवों द्वारा दस्तावेज न देने पर नोटिस जारी किए थे। इसके बाद फिर पंचायत राज विभाग की ओर से अभिलेख जमा कराने के लिए सचिवों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सभी सचिवों को अभिलेख उपलब्ध कराने के लिए नोटिस भेजा गया था। ब्लॉकों से सूचना मांगी जा रही है कि कितने सचिवों ने अभिलेख उपलब्ध कराए हैं। बाकी पर कार्रवाई की जाएगी।
स्वामीदीन, डीपीआरओ।