राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि कला का महत्व शब्दों के परे है, जबकि स्वरों का जादू भाषा से दूना असर करता है। हमारी संस्कृति, हमारी पहचान है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक विभिन्न भाषाओं में रामलीला होती है, संदेश एक होता है। राज्यपाल ने बुधवार को संस्कार भारती नाट्य केंद्र की ओर से मिल्टन पब्लिक स्कूल, अवधपुरी में आयोजित 12वें अखिल भारतीय नाट्य एवं नृत्य महोत्सव में हिस्सा लिया।
उन्होंने नाट्य केंद्र के प्रयास की सराहना की। कहा, बिना किसी सरकारी मदद के इस तरह के महोत्सव का आयोजन करना बड़ी बात है। कला बांटने से बढ़ती है और दुख बांटने से कम होता है।
संगीत और कला के बारे में उन्होंने कहा कि देश में 64 कलाएं हैं, इसमें नाट्य, नृत्य और संगीत महत्वपूर्ण हैं। इस दौरान नाट्य केंद्र के निदेशक केशव प्रसाद सिंह, प्रधान संरक्षक राजकुमार कुलश्रेष्ठ ने राज्यपाल को डा. भीमराव अंबेडकर पर आधारित पुस्तक भेंट की। राज्यपाल ने नई दिल्ली के सपन भट्टाचार्य को ब्रह्म अवार्ड, अनिल सुमन को रज्जू भइया अवार्ड, मिल्टन पब्लिक स्कूल को बेस्ट सोशल स्कूल अवार्ड दिया।
कार्यक्रम में संस्कार भारती के मुख्य संरक्षक योगेंद्र सिंह, मुकेश सिंह, कार्यक्रम अध्यक्ष पंकज सक्सेना, संरक्षक मंडल के डा. राहुल राज कुलश्रेष्ठ, चौधरी उदयभान सिंह, अलका सिंह, उमाशंकर मिश्र आदि मौजूद रहे।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी देखा
राज्यपाल ने स्कूल में करीब डेढ़ घंटे बिताए। उन्होंने चेन्नई के कलाकारों की ओर से प्रस्तुत भरतनाट्यम, मणिपुर के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत रासलीला सहित पांच नृत्य प्रस्तुतियां देखीं। शाम चार बजे वह रवाना हुए। महोत्सव के कार्यक्रम देर शाम तक चले।
पीएसी बैंड की धुन पसंद आई
आगरा। कार्यक्रम के दौरान 15वीं वाहिनी पीएसी बैंड की धुन पर राष्ट्रगान हुआ। बैंड के कलाकारों की प्रस्तुति से राज्यपाल काफी प्रभावित हुए। जाते समय उन्होंने बैंड इंचार्ज सत्यप्रकाश शर्मा को एक हजार रुपये पुरस्कार दिए।