बाह। अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए आगरा से लेकर फिरोजाबाद तक के लोग बटेश्वर के मोक्षधाम में अंतिम संस्कार के लिए पहुंचते हैं। जबकि यहां को अंत्येष्टि में काफी समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। छाया तक का इंतजाम नहीं है। टिनशेड़ जर्जर होकर झड़ चुके हैं। इसके अवशेष तक नहीं बचे हैं। बंदरों के भी हमले का खतरा बना रहता है। जनप्रतिनिधियों के सामने कई बार मामला उठाए जाने के बाद भी दिक्कतें दूर नहीं हुईं।
बटेश्वर में ग्राम पंचायत ने 14 लाख की लागत से यमुना नदी के किनारे पर मोक्षधाम का निर्माण कराया गया था। अंतिम संस्कार के लिए दो टिनशेड थे, बरामदा था, कुर्सियां पड़ी थीं। नहाने और शौच की व्यवस्था थी। सोमवार को मोक्षधाम की स्थिति का जायजा लेने के लिए दोपहर 12 बजे पहुंचे तो बीहड़ को चीरते हुए बने रास्ते के दोनों ओर बंदरों का झुंड बैठा था।
जरार के जोधाराम, बिजौली के रतन सिंह ने बताया कि शव यात्रा पर बंदरों के झुंड हमला कर देते हैं, इसलिए डंडे आदि लेकर जाना पड़ता है। 12.15 बजे मोक्षधाम पहुंचे तो बंदर घूमते मिले। स्थानीय निवासी सतीश ने बताया कि टिनशेड के अवशेष नहीं बचे हैं। खुले में अंतिम संस्कार होता है। बारिश के दिनों में अंतिम संस्कार करने वाले परिवार अपने साथ तिरपाल लाते हैं।
बाह के समाजसेवी रामशंकर गुप्ता ने बताया कि टीला धसकने से बरामदा ध्वस्त हो गया। नहाने का कोई इंतजाम नहीं है। अंतिम संस्कार के दौरान हादसे का खतरा रहता है। बाह के अलख दुबे ने भी दुर्दशा पर चिंता जताई। कहा परिजन खुद की जिंदगी खतरे में डाल कर अपने पूर्वजों का अंतिम संस्कार कराने के लिए पहुंचते हैं।
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वन विभाग की अनुमति नहीं मिल पाई है। अनुमति के प्रयास किए जा रहे हैं। अनुमति मिलते ही मोक्षधाम का जीर्णोद्धार एवं विकास कराया जाएगा।- नीरज तिवारी, खंड विकास अधिकारी बाह
मोक्षधाम का रास्ता संरक्षित वन क्षेत्र से होकर जाता है। अनुमति के बाद ही निर्माण संभव हो सकेगा। अब तक अनुमति के लिए विधिक आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है।- अमित कुमार, क्षेत्रीय वन अधिकारी, सामाजिक वानकी रेंज, बाह