कासगंज। जिला अस्पताल में बनाई गई स्पेशल न्यूबोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) जन्मजात गंभीर रोगों से ग्रस्त नवजात बच्चों को इलाज नहीं दे पाती। यूनिट में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं होने से तमाम गंभीर नवजातों को अलीगढ़ के लिए रेफर कर दिया जाता है। समय से इलाज नहीं मिलने से बच्चे की जान को खतरा रहता है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, औसतन जिले में एक साल में लगभग 37 हजार बच्चों का जन्म होता है। इनमें करीब 2500 बच्चों में जन्मजात गंभीर बीमारियों की शिकायत रहती हैं। कई बीमारियों में बच्चे को जन्म के 24 घंटे के भीतर इलाज की जरूरत होती है। तत्काल इलाज नहीं मिलने पर उसकी जान जाने का खतरा भी रहता है। इसके अलावा बच्चों के बहरे होने, आंखों की रोशनी जाने एवं शरीर के अंग के प्रभावित होने की आशंका भी रहती है। ऐसे बच्चों के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत जिला अस्पताल पर स्पेशल न्यूबोर्न केयर यूनिट की स्थापना की गई है। इसमें मात्र बच्चे में पीलिया के लक्षण पाए जाने, वजन कम होने की समस्या होने, सांस में रुकावट आने आदि का ही इलाज हो पाता है। यूनिट में बाल रोग विशेषज्ञ के तीनों पद खाली हैं। जिला अस्पताल में वैसे तो बाल रोग विशेषज्ञ मौजूद हैं, लेकिन सर्जन बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती अब तक नहीं हुई। जिससे गंभीर जन्मजात गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों का इलाज नहीं हो पाता।