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हवाई यात्रा पर ताजनगरी से हवा-हवाई बातें, सरकार को नहीं मिल रहे ऑपरेटर

Tue, 10 Oct 2017 07:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
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ताजमहल के शहर आगरा को प्रदेश और देश के दूसरे महानगरों से विमान सेवा के जरिये जोड़ने की नीतियां हवा-हवाई साबित हो रही हैं। हर सरक‌ार नीति बनाई जाती है और बस वही बनकर रह जाती है। वर्तमान प्रदेश सरकार ने भी पखवाड़े पहले नई नागरिक उड्डयन नीति जारी की। 
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रियायतों का अंबार लगा दिया गया है। लेकिन, तमाम सुविधाओं के बावजूद आगरा को उड़ान सेवा से जोड़ने वाले आपरेटर संचालन को तैयार नहीं हैं। नई नीति में आगरा को लखनऊ और कोलकाता से जोड़ने का सुझाव दिया गया है, जबकि पुरानी नीति के पुराने रूट पर तीन साल में भी उड़ानें शुरू नहीं हो सकीं।

प्रदेश सरकार ने आगरा, वाराणसी, लखनऊ, गोरखपुर, इलाहाबाद आदि शहरों के बीच रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत विमान सेवा शुरू कराने वाले आपरेटरों को एयर टर्बाइन फ्यूल पर वैट जीरो करने, बिजली, पानी, आफिस किराया, जीएसटी आदि से मुक्त किया है। 
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आपरेटर फिर भी प्रदेश के इन शहरों को उड़ान से जोड़ने को तैयार नहीं हैं। पूर्ववर्ती सपा सरकार ने हेरिटेज आर्क के शहरों आगरा-लखनऊ-वाराणसी के बीच विमान सेवा शुरू करने का एलान किया था लेकिन बिड होने के बावजूद आपरेटर आगे नहीं आए।

नई नीति में अफसरशाही की बल्ले-बल्ले

प्रदेश की नई नागरिक उड्डयन नीति में अफसरों की बल्ले-बल्ले होगी। नीति में कहा गया है कि प्रदेश सरकार आईएएस, आईपीएस, आईएफएस अधिकारियों को देश के किसी भी रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम उड़ान की सुविधा देगी। 

सभी पीसीएस, पीपीएस अधिकारियों को प्रदेश के अंदर की उड़ानों की सुविधा दी जा सकती है। ग्रुप-ए अधिकारियों को प्रदेश के अंदर सभी एयरपोर्ट पर उड़ान की सुविधा दी जाएगी।

इतनी सुविधाएं, फिर भी हवाई ही रही उड़ान

- 10 साल तक एटीएफ पर वैट रहेगा जीरो।
- उड़ान में 20 फीसदी राज्यों का हिस्सा।
- राज्य सरकार देगी आरसीएस एयरपोर्ट को सुरक्षा।
- राज्य सरकार द्वारा पानी, अग्निशमन सुविधा मुफ्त।
- 30 हजार यूनिट बिजली प्रतिमाह तक चार रुपये प्रति यूनिट।
- तेल कंपनियों को एटीएफ भरने के लिए जमीन मुफ्त।
- आरसीएस एयरपोर्ट तक पीडब्ल्यूडी सड़क बनाकर देगा।
- लखनऊ से मंडल मुख्यालयाें तक उड़ान पर अंडरराइट सीटें।
- टिकट बिक्री पर एस-जीएसटी की तीन साल तक प्रतिपूर्ति।
- एयरपोर्ट पार्किंग, नाइट हॉल्ट पर तीन साल तक शुल्क नहीं।
- तीन साल तक 100 वर्ग मीटर का आफिस का किराया नहीं।
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इन नये रूटों का सुझाव

लखनऊ-आगरा
आगरा-इलाहाबाद
आगरा-लखनऊ-कोलकाता
  ये रूट हो चुके हैं फेल लखनऊ-वाराणसी-आगरा
लखनऊ-इलाहाबाद-गोरखपुर
लखनऊ-गोरखपुर-इलाहाबाद
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