सरकारी अस्पताल में चल रहे प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर दवाओं की कमी है। सर्जिकल सामान भी नहीं हैं। इससे सस्ती दवाएं मरीजों को नहीं मिल पा रही। मरीज व तीमारदार निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने को मजबूर हैं।
एसएन मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, लेडी लॉयल और मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में स्थित जन औषधि केंद्रों पर 250 से 300 तरह की ही दवाएं मिल रही हैं, जबकि 600 से अधिक तरह की दवाएं उपलब्ध कराने का बोर्ड लगा है। केंद्रों पर त्वचा रोग, न्यूरोलॉजी, ईएनटी रोग, आयरन सिरप, इंजेक्शन, एंटीबायोटिक, कान-नाक की दवाओं की कमी है। यहां 90 फीसदी कम कीमत में दवाएं मिलती हैं, जिससे भीड़ भी लगी रहती है। 145 तरह के सर्जिकल सामान भी नहीं हैं। सिकाई के लिए रबर का बैग, बीपी मापक, मधुमेह मापक समेत अन्य सर्जिकल सामान की इन दिनों अधिकांश घरों में जरूरत भी है।
दवाओं का आर्डर कर दिया है, दो-तीन दिन में आ जाएंगी
- जन औषधि केंद्र के प्रभारी रविंद्र सिंह ने बताया कि चारों केंद्रों से दवाओं की डिमांड मंगाकर शासन को भेज दिया है। सर्जिकल सामान की ज्यादा मांग नहीं होने के कारण इनकी कमी है। मौसमी बीमारियों के इलाज में उपयोग होने वाले सर्जिकल सामान भी मंगा रहे हैं। दवाएं दो-तीन दिन में आ जाएंगी।
यह बोले मरीज:
- त्वचा रोग की परेशानी होने एसएन के काउंटर पर दवा नहीं मिली, पर्चा लेकर जनऔषधि केंद्र पर गई तो यहां पर्चे पर लिखी दवाओं में से एक भी नहीं मिली। पायल शर्मा,
- हाथ और पैरों की नस के दर्द की दवा केंद्र पर लेने गया तो बताया कि इनकी दवाएं हैं नहीं है। दर्द निवारक ऑइनमेंट मिल जाएगा। लेकिन इसकी जरूरत नहीं थी। विजय शंकर
- गले में खराश, नाक में एलर्जी हो रही है। सरकारी अस्पताल में इनकी दवाएं नहीं मिली। बताया कि दवाओं की कमी है। दो-तीन दिन बाद दवाएं आ जाएंगी। करतार सिंह
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