कासगंज। चुनाव आयोग के डंडे ने चुनाव प्रचार का तरीका बदल दिया है। अब झंडा और बैनर नहीं दिखाई देते हैं। लाउडस्पीकर का शोर भी थम गया है। चुनावी नारों से रंगी दीवारें भी अब नजर नहीं आती हैं। इस बदलाव ने आम लोगों को काफी राहत दी है। अब चुनाव का ज्यादातर जोर मोबाइल फोन पर दिखाई देने लगा है। लोकसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। चुनाव होने में एक पखवाड़े का समय रह गया है, लेकिन माहौल को देखकर ऐसा लग ही नहीं रहा कि लोकसभा के चुनाव होने जा रहे हैं। यह सब बदलाव चुनाव आयोग की सख्ती के चलते संभव हुआ है।
बुजुर्ग बताते हैं कि पहले के चुनाव प्रचार के तौर तरीके एवं आज के चुनाव प्रचार के तौर तरीके में काफी बदलाव आ चुका है। चुनाव की घोषणा होने के साथ ही लोग अपने समर्थित राजनीति दल या प्रत्याशी के झंडे बैनर को उत्साह के साथ लगाते थे, दीवारों पर नारे लिखकर राजनीति फिजा को रंग चढ़ाया जाता था। राजनीतिक दलों की ओर से तैयार कराए गए गाने गली मोहल्लों के नुक्कड़ पर लगने वाले लाउडस्पीकर से सुनाई देते थे। राजनीति दल बच्चों को बिल्ले बांटते थे, लेकिन अब ऐसा नजर नहीं आता।
अब सोशल मीडिया बन रहा सहारा
समय बदलने के साथ अब चुनाव प्रचार का तरीका भी बदल गया है। अब राजनीतिक दलों ने अपनी सोशल मीडिया टीमें बना ली हैं। इन टीमों के माध्यम से लोगों के सोशल मीडिया एकाउंट पर प्रचार किया जाता है।
बिल्ला-स्टीकर गुजरे जमाने की बात
पहले के चुनाव में हर राजनीतिक दल बिल्ला व स्टीकर बांटते थे। जिस नेताओं का काफिला आता बच्चों की टोलियां उसी में शामिल हो जाते, लेकिन अब यह गुजरे जमाने की बात हो गई है।- केदारी, मतदाता
चुनाव का शोर कम हो गया। यह अच्छी बात है। पता ही नहीं चल रहा कि चुनाव हो रहे हैं। परीक्षा के दौरान चुनाव होने पर शोर शराबा बच्चों को परेशान करता था- यादराम, मतदाता