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UP News: खनन माफिया और उसके गुर्गों में नहीं रहा खाकी का खौफ, पुलिस नेटवर्क तोड़ने में नाकाम; ये है वजह

Mon, 09 Sep 2024 08:50 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा में खनन माफिया के नेटवर्क इतना मजबूत है कि पुलिस व प्रशासन इसे तोड़ने में नाकाम साबित हो रहे हैं। राजस्थान सीमा से सटे खेरागढ़ में इनका सबसे बड़ा अड्डा है। 
 
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यमुना पुल के समीप अवैध खनन
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विस्तार
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सूबे में खनन माफिया का दुस्साहस नहीं थम रहा। खनन माफिया और उसके गुर्गों मेंं खाकी का खौफ नहीं रहा। शनिवार को खेरागढ़ में इन लोगों ने सिपाही को गोली मारी। घायल सिपाही को ले जा रहे इंस्पेक्टर की गाड़ी में टक्कर मारी और पुलिस को दौड़ाया भी। अफसरों के मूकदर्शक होने को इसकी वजह माना जा रहा है।
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यह पहली बार नहीं हुआ। पहले भी खनन माफिया बैरियर तोड़ने, पुलिस टीम पर फायरिंग, तहसीलकर्मियों पर हमला, दहशत फैलाने की वारदात कर चुके हैं। इनका नेटवर्क तोड़ने में पुलिस और प्रशासन दोनों नाकाम हैं। राजस्थान सीमा से सटा खेरागढ़ तहसील खनन का सबसे बड़ा अड्डा बन गया है। यहां से होकर राजस्थान से अवैध खनन के वाहन गुजरते हैं।

 

लोगों का आरोप है कि एसडीएम से लेकर तहसीलदार और एसीपी से लेकर थानेदार तक मूकदर्शक बने रहते हैं। खनन माफिया और उसके गुर्गों का दुस्साहस इसी से बढ़ रहा है। बाह, पिनाहट, किरावली, फतेहपुर सीकरी में भी वारदात हो चुकी हैं।


 

सीसीटीवी, चेकपोस्ट व अन्य कवायद फेल
चार साल पहले फतेहाबाद में खनन माफिया ने पुलिस पर हमला किया था। पकड़ी ट्राॅलियों को छुड़ाकर ले गए थे। तब तत्कालीन डीएम पीएन सिंह ने अरनोटा सहित चार जगह चेकपोस्ट बनवाई। वन, राजस्व, पुलिस आदि विभागों की टीमें लगाईं। इसके अलावा बॉर्डर मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए। लेकिन, चार साल बाद भी तमाम कवायद फेल नजर आ रही हैं।

 
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विभागों में बंधा है महीना
 जन प्रहरी संस्था के संयोजक नरोत्तम सिंह शर्मा का आरोप है कि खनन माफिया इलाका पुलिस से लेकर तहसील व अन्य विभागों को महीना देता है। हर महीने लाखों रुपया पहुंचता है। कर्मचारी से लेकर अधिकारियों तक में बंटता है। इसी वजह से खनन माफिया की कमर तोड़ने में पुलिस व प्रशासन नाकाम है।
 
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