मैनपुरी। ग्राम प्रधानों का पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा होने को है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की कवायद भी शुरू हो गई है। पंचायतों में विकास के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन हर घर तक विकास की किरण नहीं पहुंच सकी। बात भोगांव क्षेत्र की ग्राम पंचायत महावतपुर की करें तो यहां विकास तो हुआ, लेकिन कई मजरों को आज भी विकास का इंतजार है। ग्राम पंचायत के कुछ ग्रामीण प्रधान की कार्यशैली से खुश हैं तो कुछ का आरोप है कि प्रधान ने मजरों में विकास कार्य के दौरान पक्षपात किया है। अपने चहेतों के तो काम कराए हैं, लेकिन आम जनता की ओर ध्यान नहीं दिया है। प्रधान से असंतुष्ट ग्रामीणों को अब चुनाव का इंतजार है।
हाईलाइट्स
10 गांव शामिल हैं ग्राम पंचायत महावतपुर में
07 हजार के करीब ग्राम पंचायत क्षेत्र की है आबादी
35 सौ के करीब ग्राम पंचायत क्षेत्र में हैं मतदाता
ग्राम पंचायत में ये गांव हैं शामिल
मुरली नगर, नगला पाठ, भवानी नगर, नगला खरा, नगला सुखु, नगला मांधाता, नगला दिन्ना, नगला शीश, सरवा, शांति फार्म।
पंचायत में ये हुए काम
नगला भवानी, नगला पाठ, सरवा और मुरलीनगर में इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण हुआ और नालियां बनवाई गईं। ग्राम पंचायत क्षेत्र के नौ स्कूलों का सौंदर्यीकरण कराया गया। नगला खरा में आठ सौ मीटर सीसी रोड का निर्माण हुआ।
जनता की शिकायत
गांव में सिर्फ 125 शौचालय बनाए गए हैं। शौचालयों का निर्माण अपने चहेतों के यहां हुआ। आवास निर्माण में ग्रामीण धांधली का आरोप लगा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई लाभार्थियों का पैसा दूसरों को दिया गया।
राज्य वित्त में कुल दस लाख और 14वें वित्त से कुल तीस लाख रुपये मिले। इसके साथ ही स्वच्छ भारत मिशन के तहत 15 लाख रुपये की धनराशि मिली है। पैसा विकास कार्यों पर खर्च किया गया है। बजट की कमी के चलते कुछ कार्य शेष रह गए हैं।
पुष्पेंद्र सिंह, ग्राम प्रधान
प्रधान ने गांव में मुरलीनगर क्षेत्र में काम कराए हैं। गलियों और नालियों का निर्माण हुआ है। हालांकि कुछ जगहों पर विकास कार्यों की जरूरत है, लेकिन वहां कामकाज नहीं हो पाए हैं।
मनोज कुमार
प्रधान द्वारा सभी गांवों में मानक के अनुसार कार्य नहीं कराए गए हैं। सिर्फ अपने चहेतों को विकास की सौगात दी गई है। स्वच्छ भारत मिशन को भी पलीता लगाया गया है बहुत से गांव में शौचालय नहीं बनवाए गए।
-जगदीश सिंह, पूर्व प्रधान
ग्राम प्रधान ने अपने चहेतों के गांव में तो विकास कार्य कराए हैं। नगला सुखु में तो अभी सड़कें तक नहीं बनी हैं। नालियों का पानी गलियों में भरता है, जिससे निकलने में परेशानी होती है।
अभिसिंचन यादव