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क्राइम नहीं, लाइन कंट्रोल में लगी रही पुलिस

Fri, 09 Dec 2016 12:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/आगरा
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2000 का नोट - फोटो : SELF
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500 और एक हजार के नोट बंद होने के बाद कैश की समस्या को लेकर बवाल खूब हुए। पिछले 30 दिन में क्राइम कंट्रोल करने के बजाय, पुलिस को बैंकों के बाहर लगी लाइन कंट्रोल करनी पड़ी। बैंकों में कैश न होने पर लोग भड़के तो पुलिस से विवाद भी हुआ। पुलिस ने लोगों पर खूब डंडे भी बरसाए। पुलिस पर बैंक मैनेजर को धमकाने का आरोप भी लगा। इस पर दरोगा को लाइन हाजिर तक करना पड़ा।
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बता दें, नोटबंदी के बाद शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने कमर कस ली थी। बैंकों के बाहर पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गईं। इसके बावजूद कई बैंकों में बवाल हुए। कई बैंकों के बाहर पथराव हुआ। बुधवार को ही जगनेर में बैंक में कैश नहीं मिलने पर ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया था। पुलिस पर पथराव किया था। इसमें एक इंस्पेक्टर सहित चार पुलिस कर्मी घायल हो गए थे। इसके अलावा पिछले दिनों शाहगंज में कैश नहीं मिलने पर लोगों ने हंगामा किया था। इस दौरान एक दरोगा ने महिलाओं की पिटाई लगाई थी। एत्माद्दौला क्षेत्र की बैंक में कई बार बवाल हुआ। कालिंदी विहार में एक बैंक के मैनेजर को चौकी इंचार्ज ने धमकाया। पुलिस अधिकारियों ने शिकायत मिलने पर दरोगा को लाइन हाजिर कर दिया था। पिछले दिन 30 में कोई बड़ी लूट की घटना नहीं होने से पुलिस ने जहां राहत की सांस ली तो वहीं बैंकों के बाहर लाइन कंट्रोल करने में पसीने छूट गए। बाह, पिनाहट, खेरागढ़, बरहन आदि क्षेत्र में भी हंगामे होते रहे।

नहीं मिल रही सुरक्षा
एत्माद्दौला क्षेत्र में एक बैंक के कर्मचारियों ने बताया कि कैश नहीं आया है। इसकी वजह है पुलिस की सुरक्षा का न मिलना। इस कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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फौजी और मरीजों के लिए बांटा कैश
फाउंड्री नगर स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में 30 दिन बाद भी कैश की समस्या रही। आम लोगों को पैसा नहीं मिल सका। बैंक कर्मियों ने छुट्टी पर आए सैन्य कर्मियों को कैश उपलब्ध कराया। वहीं इलाज के पर्चे दिखाने वाले लोगों को भी कैश दिया गया। बैंक कर्मचारियाें का कहना था कि सैन्य कर्मियों के पास ड्यूटी पर जाने के लिए रुपये नहीं थे। इस समस्या को देखते हुए कैश दिया गया। उन्हें भी पूरा कैश नहीं मिल सका।
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