फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गुमनाम धरोहरें: ताजनगरी में पर्यटकों को सुविधाएं भी नहीं दे पा रहा पर्यटन विभाग, ऐसा है हाल

Fri, 27 Sep 2019 12:14 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
ताजमहल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
आगरा में जिस पर्यटन विभाग पर पर्यटन को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी है, पर्यटकों को सुविधाएं नहीं दे पा रहा है। जैसे दिल्ली, जयपुर में पर्यटकों के लिए स्मारकों तक बस सेवा है, वैसी आगरा में नहीं है। ऐसे में सैलानी आगरा दर्शन कैसे करें? वे तो ताजमहल देखकर ही लौट रहे हैं। तीन साल पहले कैंट से ताजमहल तक बस सेवा शुरू हुई थी, वो भी दो महीने में बंद कर दी गई।
विज्ञापन


ट्रेन से आने वाले सैलानी कैंट पर उतरते हैं। यहां से ताजमहल, आगरा किला, फतेहपुर सीकरी सहित किसी भी स्मारक के लिए सीधी बस नहीं है। इसी का फायदा टैक्सी, ऑटो वाले और लपके उठा रहे हैं।

निर्धारित शुल्क वाली टैक्सी सेवा भी स्मारकों के लिए नहीं है। यही वजह है कि ताजमहल के मुकाबले अकबर टूम, फतेहपुर सीकरी, एत्मादउद्दौला या अन्य स्मारकों तक 50 फीसदी सैलानी भी नहीं पहुंचते। चीनी का रोजा, झुनझुन कटोरा, रामबाग जैसे स्मारकों पर तो गाइड तक नहीं हैं।
विज्ञापन
Trending Videos

आगरा टूरिज्म डेवलेपमेंट फाउंडेशन के सचिव गौरव सिंह चौहान ने बताया कि बड़ी विडंबना है कि एक स्मारक से दूसरे स्मारक के बीच कनेक्टिविटी नहीं है। ऐसे में पर्यटकों के पास ठगी का शिकार होने और समय खराब करने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं रहता। 

होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के सचिव संजीव जैन ने कहा कि सुविधाएं न होने का नतीजा है कि पर्यटक यहां एक बार आने के बाद दोबारा आने के बारे में नहीं सोचता। जबकि यहां तो इतिहास का इतना खजाना है कि पर्यटक बार-बार आए। 

'प्रस्ताव भेजा है, रिमाइंडर दे रहे हैं'

सवाल: स्मारकों के बीच कनेक्टिविटी क्यों नहीं हो पा रही है?
जवाब: हमारी ओर से रोडवेज को सिटी बस सर्विस के तहत प्रस्ताव गया हुआ है। कई बार बैठकों में इस पर चर्चा हुई है। हमारी ओर से रिमांडर पत्र भी जारी किए गए हैं।
सवाल: क्या हैं प्रस्ताव?
जवाब: आगरा कैंट से पुरानी मंडी चौराहा, शिल्पग्राम, आगरा किला, महताब बाग, रामबाग, दयालबाग, सिकंदरा और यहां फिर आगरा कैंट। इसी रूट पर बस लौटेंगी भी।
- अमित कुमार, उपनिदेशक, पर्यटन
विज्ञापन

'सिटी बसें पुरानी हैं, नई का इंतजार है'

सवाल : पर्यटन विभाग के प्रस्ताव पर अमल क्यों नहीं हो पा रहा?
जवाब: विभाग का प्रस्ताव मिला है। सिटी बसें पुरानी हो चुकी हैं। नई इलेक्ट्रिक बसें आनी हैं। इन्हें शुरू किया जाएगा।
सवाल: कब तक शुरू होगी यह सुविधा?
जवाब: बसें खरीदने का काम लखनऊ स्तर पर होगा। इसका टेंडर हो चुका है। उम्मीद है कि तीन महीने में स्मारकों के बीच सिटी बस सर्विस शुरू हो जाए।
सवाल: तब तक पर्यटक ऐसे ही परेशान होते रहेंगे क्या?
जवाब: जल्दबाजी में पुरानी बसें शुरू करने से भी पर्यटकों को परेशानी हो सकती है। नई बसें अधिक सुविधाजनक होगी। थोड़े दिनों की और बात है। पर्यटकों को अच्छी सुविधा मिलेगी।
- आरबीएल शर्मा, एमडी, महानगर बस सेवा
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें