कासगंज के गांव निजामपुर में बरसों से चली आ रही रूढ़िवादी परंपरा रविवार को टूट गई। गांव में पहली दफा दलित की बारात शान से निकली। घोड़ा बग्गी पर सवार होकर दूल्हा संजय बारात लेकर आया।
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कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शादी संपन्न कराई गई। इसके साथ ही संजय और शीतल वैवाहिक बंधन में बंध गए। सोमवार की सुबह बारात की विदाई हुई। इस चर्चित शादी में सैकड़ों लोग शामिल हुए।
गांव निजामपुर में पहली बार किसी दलित की बारात ने पूरे गांव का भ्रमण किया। बारात प्रशासन द्वारा निर्धारित मार्गों से गांव में होकर दुल्हन के घर तक पहुंची। इस दौरान भारी पुलिस फोर्स मौजूद रहा।
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गांव में रहा ऐसा माहौल
दलित संजय और शीतल की शादी
निजामपुर गांव में दुल्हन बनी शीतल के घर सुबह से विवाह की तैयारियां चल रही थीं। सुबह करीब 10 बजे दुल्हन के हाथों में उसकी सहेलियां मेहंदी लगा रही थीं। वहीं घर के पास एक छप्पर के नीचे दावत के खाने की तैयारी चल रही थी।
कुतबपुर रोड पर बारात के लिए जनमासा तैयार किया जा चुका था। निजामपुर तिराहे पर बारात के स्वागत के लिए तोरणद्वार सजाया गया था। जनमासा, गांव की गलियों में सफाई कर्मी सफाई कार्य में जुटे थे।
शीतल के घर लगातार नाते रिश्तेदारों के आने जाने का सिलसिला जारी था। दोपहर 11 से 12 बजे के बीच काफी रिश्तेदार घर में आ चुके थे। महिलाएं घर के आंगन में ढोलक की थाप पर मंगल गीत गा रही थीं।
एक घंटा देर से पहुंची बारात
दलित संजय और शीतल की शादी
- फोटो : अमर उजाला
दोपहर में शीतल के मामा के परिवार के लोग पहुंचे तो महिलाओं ने मंगल गायन करते हुए भात के गीत गाए और भातई परिवार का स्वागत किय। बारात के आने का समय दोपहर तीन बजे निर्धारित था।
गांव के जनमासे पर बैंडबाजे भी सजकर तैयार थे और बग्गी भी तैयार थी। घोड़ा बग्गी को फूलों से सजाया गया। शाम चार बजे तक सब तैयारियां पूरी हो चुकीं थी। अब बस बारात के आने का इंतजार था।
बारात तीन घंटे विलंब से पहुंची। बार-बार शीतल का भाई बीटू बारात की लोकेशन ले रहा था। वहीं प्रशासनिक अधिकारी भी बारात को लेकर बार बार फोन पर हाथरस पुलिस से जानकारी ले रहे थे। शाम छह बजे बारात शुरू हुई।
'अधिकार की जंग लड़ी'
दलित संजय और शीतल की शादी
बारात चढ़ने का इंतजार खत्म होते ही लोगों में उत्साह नजर आने लगा। बारात नाचते गाते दुल्हन के घर तक जा पहुंची। सवा सात बजे दुल्हन के घर महिलाओं ने बारात की अगवानी की और मंगल गीत गाए।
इसके बाद वैवाहिक रस्में शुरू हुईं। जनमासे में नाश्ता और भोज का कार्यक्रम चला। गांव में बारात शांतिपूर्वक निकलने से सभी लोग बेहद उत्साहित थे। रात 10 बजे वर और वधू की जयमाला हुई। इसके बाद अन्य रस्में पूरी हुईं।
सोमवार सुबह को दूल्हा संजय अपनी दुल्हन शीतल को लेकर विदा हो गया। उसके चेहरे पर विजयी मुस्कान का भाव था। संजय ने कहा कि उसने अधिकार की जंग लड़ी है। उसने कोई ऐसा कार्य नहीं किया, जिससे किसी को ठेस पहुंचे।
वो स्वतंत्र हैं और सभी को समान अधिकार प्राप्त हैं। उसने जिला प्रशासन का भी शुक्रिया जताया। उसने कहा कि प्रशासन ने सहयोग किया है और सुरक्षा के इंतजाम किए हैं। वहीं दुल्हन शीतल ने इस शादी पर खुशी जताई।
गौरतलब है कि गांव निजामपुर में सवर्णों ने दलित दूल्हे की बारात चढ़ने का विरोध किया था। इस पर संजय ने प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई थी। इस चर्चित शादी में घराती और बाराती दोनों पक्षों से सैकड़ों ने हिस्सा लिया।