फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इंसाफ के इंतजार में आगरा की कई 'निर्भया', अदालतों में लंबित हैं दुष्कर्म के 500 केस

Sat, 21 Mar 2020 12:43 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

आगरा में दुष्कर्म के 500 मामले अदालतों में लंबित हैं। इनमें से 176 मामले पॉक्सो एक्ट के हैं। 
विज्ञापन
पीड़ित (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : AMAR UJALA
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

'निर्भया' के गुनहगारों को सात साल बाद शुक्रवार को फांसी पर लटका दिया गया। लंबा समय लगा, लेकिन इंसाफ मिला। आगरा की 'निर्भयाओं' को भी इंसाफ का इंतजार है। चर्चित मामलों में भी तारीख पर तारीख हो रही है।
विज्ञापन


आगरा में दुष्कर्म के 500 मामले अदालतों में लंबित हैं। इनमें से 176 मामले पॉक्सो एक्ट के हैं। जिनमें बच्चियों और किशोरियों के साथ दरिंदगी हुई। पुलिस ने थानावार इनकी सूची बना रखी है। पैरवी तेज की जा रही है, फिर भी समय लग रहा है।

शोधछात्रा हत्याकांड : सात साल से तारीख पर तारीख

न्यू आगरा के एक शिक्षण संस्थान में 15 मार्च 2013 को नैनो टेक्नोलॉजी की शोध छात्रा की लैब में दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई। पहले पुलिस ने जांच की, फिर सीबीआई ने। हाईकोर्ट ने जल्द सुनवाई पूरी करने के आदेश दिए लेकिन तारीख पर तारीख ही चल रही है। आरोपी उदय स्वरूप और यशवीर सिंह संधू जेल में हैं।
विज्ञापन


एत्माद्दौला में हुई थी निर्भया जैसी दरिंदगी

21 दिसंबर 2019 को एत्माद्दौला में मनोरोगी युवती से दुष्कर्म किया गया। विरोध पर उसका सिर ईंट से कुचलकर हत्या कर दी गई। उसका कोई अपना नहीं आया, दाह संस्कार भी पुलिस ने कराया। आरोपी सुगढ़ सिंह उर्फ सोड़ा निवासी एटा जेल में है।
विज्ञापन

2018 की घटना, इंसाफ अब तक नहीं

आगरा कॉलेज के मैदान में आठ साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई। इसी कॉलेज का एलएलबी का छात्र हरीश ठाकुर आरोप में जेल भेजा गया। वह जेल में ही है लेकिन इंसाफ नहीं हुआ है। बच्ची को फुटपाथ से उठाकर ले जाया गया था। सीसीटीवी फुटेज से केस खुला था।

एत्मादपुर कांड में दी गई सजा-ए-मौत

एत्मादपुर क्षेत्र में बेटी की दुष्कर्म के बाद हत्या के दोषी पाए गए पिता को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट वीके जायसवाल ने फांसी की सजा सुनाई है। घटना 24 नवंबर 2017 को हुई थी। उसने फांसी के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील कर दी, जो लंबित है। 

39 साल से नहीं दी गई फांसी

आगरा जिला जेल में फांसी घर है लेकिन यह 25 साल से खराब पड़ा है। इसमें आखिरी फांसी 1991 को दी गई थी। यह बुलंदशहर के जुम्मन को मिली थी। उसने फिरोजाबाद में हत्या की थी। यूपी में सिर्फ आठ जिलों में फांसी घर है। इनमें महिला फांसी घर सिर्फ मथुरा में है। यह भी जर्जर हो चुका है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें