राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कर्मचारियों की हड़ताल से चिकित्सकीय सेवाएं बदहाल हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्चा लेकर मरीज इलाज के लिए भटकते रहे। कई विभागों के चिकित्सक नहीं होने पर मरीज इलाज बिना ही लौट गए। स्वास्थ्य विभाग की ओर से किए गए वैकल्पिक व्यवस्था के बावजूद मरीजों को परेशानी हुई।
एनएचएम के तहत 1351 स्टाफ सेवारत हैं। इसमें चिकित्सक, फार्मासिस्ट, टेक्नीशियन एवं अन्य स्टाफ हैं। ये स्थायी करने और समान कार्य-समान वेतन के लिए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। हड़ताल के दूसरे दिन भी मरीजों को परेशानी हुई। जिला अस्पताल में फिजियोथेरेपी, आहार कक्ष, जीरियाट्रिक समेत कई विभाग में चिकित्सक नहीं बैठे। इलाज कराने के लिए आए मरीजों ने पर्चा बनवा लिया। चैंबर के बाहर घंटों इंतजार किया लेकिन डॉक्टर नहीं आए।
कई विभागों में तो ताला लगा रहा। ऐसे में मरीज पर्चा लेकर इलाज के लिए भटकते रहे। यही स्थिति शहरी स्वास्थ्य केंद्र और सीएचसी-पीएचसी पर रहे। स्टाफ की हड़ताल से मरीजों को इलाज, जांच और दवा के लिए परेशान होना पड़ा। जिला अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक डॉ. सुनीता राठौर ने बताया कि मरीज को देखने के लिए एसएन मेडिकल कॉलेज से अतिरिक्त स्टाफ मंगाया गया है, फिर भी कुछ जगह पर डॉक्टरों की अनुपस्थिति में इलाज प्रभावित हुआ है।
सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि हड़ताल को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। मरीजों को परेशानी हुई है। एनएचएम कर्मियों की मांगों को शासन तक भी अवगत करा दिया है।
मरीजों ने बयां किया दर्द
- डॉक्टर साहब के चैंबर के बाहर बैठी रही। काफी देर बाद पता चला कि डॉक्टर साहब हड़ताल में गए हैं। ऐसे में बिना इलाज के ही लौटना पड़ रहा है। - कल्लो, यमुनापार घाट
- जिला अस्पताल में पर्चा बनवाने के बाद डॉक्टर साहब को दिखाने गई। यहां चैंबर में कोई नहीं बैठा था। पर्चा लेकर भटकती रही। गार्ड से पता चला कि डॉक्टर नहीं आएंगे। बाद में दूसरे डॉक्टर को दिखाने को कहा। - रेखा, नरायच
- इलाज के लिए जिला अस्पताल आया। यहां पर्चा बनवाने के बाद ओपीडी में दिखाने गया। यहां पर कमरे पर ताला लगा था। अन्य मरीजों से पता चला कि डॉक्टर हड़ताल में गए हैं, इसके कारण ये बंद पड़ा है। - शिवशंक, बरौली अहीर