पर्यावरणविद् व समाजसेवी डीके जोशी ने वर्ष 1992 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें पेयजल, सीवर, नाली निर्माण और सॉलिड वेस्ट निस्तारण में 500 करोड़ रुपये के घोटाले के साक्ष्य उपलब्ध कराए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मॉनीटरिंग कमेटी का गठन किया गया।
वर्ष 2017 में में सुप्रीम कोर्ट ने अपने यहां दायर केस को एनजीटी में स्थानांतरित कर दिया। फरवरी 2019 में एनजीटी ने नगर निगम पर 25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाते हुए मुख्य सचिव को तलब किया था। इसी क्रम में नगर निगम अधिकारियों सॉलिड वेस्ट का शत-प्रतिशत निस्तारण को लेकर अपना जवाब एनजीटी में पेश किया है।
एनजीटी के जुर्माना से राहत पाने के लिए नगर निगम ने एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी दाखिल की है, जिसकी सुनवाई 31 अगस्त को है। जिसमें कुबेरपुर में एकत्रित छह लाख टन कूड़े के निस्तारण को लेकर अनुमति मांगी गई है। अगर सुप्रीम कोर्ट 31 अगस्त को निगम अधिकारियों को अपनी स्वीकृति मिल जाती है तो एक वर्ष में पूरे कूड़े का निस्तारण करने का दावा निगम अधिकारी कर रहे हैं।
14 अगस्त को होगी डूब क्षेत्र की सुनवाई
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में यमुना नदी के डूब क्षेत्र को लेकर भी सोमवार को सुनवाई हुई, जिसमें 14 अगस्त की तारीख मिली है। बताते चले कि यमुना किनारे बने 58 अवैध निर्माणों के अलावा 13 बड़े प्रोजेक्टों को लेकर एनजीटी में मामला विचाराधीन है। जिनमें पुष्पांजलि हाईट्स, कल्याणी हाइट्स, मंगलम एस्टेट एक्टेशन, तनिष्क राजश्री, राजश्री गार्डन, गणपति वंडर सिटी, जवाहर बाग, राधा बल्लभ स्कूल शामिल है।