जिले के तालाबों, पोखरों और झीलों के संरक्षण को लेकर दाखिल याचिका पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने अजय प्रताप सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य के खिलाफ दायर याचिका पर 17 सितंबर को सुनवाई की। जिसमें सभी विपक्षी गणों को नोटिस जारी कर दिए। साथ ही जल निकायों की स्थिति की जांच के लिए संयुक्त कमेटी गठित करने के निर्देश दे दिए ।
वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने याचिका के माध्यम से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित तालाबों, पोखरों और झीलों के संरक्षण की मांग की है। सुनवाई के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि कई जल निकायों पर अतिक्रमण हो चुका है। घरों का गंदा पानी और कूड़ा भी तालाबों में डाला जा रहा है। इसके समर्थन में जीपीएस लोकेशन, सेटेलाइट इमेज और राजस्व अभिलेख प्रस्तुत किए गए। याचिका में मुहम्मदपुर, लखनपुर, सुनारी, मघटई, इकथरा, अभयपुरा, अकबरपुर, अकोला, इस्लामपुर, इटौरा, रुनकता समेत कई गांवों के तालाबों का विवरण दिया।
ककरैठा स्थित गुरु का ताल और एत्मादपुर स्थित बुढ़िया का ताल से अतिक्रमण हटाकर संरक्षण और जीर्णोद्धार की मांग भी की गई। इस पर एनजीटी ने संयुक्त कमेटी में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पर्यावरण विभाग, टीटीजेड और जिलाधिकारी आगरा के प्रतिनिधियों को शामिल करने के निर्देश दिए हैं। कमेटी राजस्व अभिलेखों से प्रत्येक जल निकाय के वास्तविक क्षेत्रफल का मिलान कर अतिक्रमण की स्थिति जांच करेगी और 10 सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करगी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जल निकायों के पानी के नमूनों की जांच रिपोर्ट भी दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले में अगली सुनवाई 21 दिसंबर को होगी।