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एनजीटी ने डीएम भरतपुर पर लगाया जुर्माना, मथुरा के डीएम को हिदायत, यह है मामला

Sat, 09 Nov 2019 03:55 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
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NGT - फोटो : PTI
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गिरिराज परिक्रमा संरक्षण संस्थान की याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने राजस्थान के भरतपुर के जिलाधिकारी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना निर्धारित अवधि में शपथ पत्र दाखिल न करने पर लगाया गया है, जबकि मथुरा के जिलाधिकारी को सड़क के सभी प्रोजेक्ट समय से पूरा करने की हिदायत दी है।
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शुक्रवार को सुनवाई के दौरान एनजीटी ने सबसे पहले उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिवक्ता प्रदीप मिश्रा से पूछा कि मानसी गंगा का पानी पीने योग्य है। बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला देते हुए अधिवक्ता ने कहा कि मानसी गंगा का पानी पीने योग्य नहीं है। यह भी कहा कि सीवर का पानी आम दिनों में नहीं जाता है। 

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी ने इसका विरोध किया। कहा कि बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार मानसी गंगा में कोलीफॉर्म की मात्रा बहुत अधिक है, जो सीवर के पानी की मौजूदगी मानसी गंगा में दर्शाती है। इस पर न्यायाधीश रघुवेंद्र सिंह राठौर व सत्यवान सिंह गर्ब्याल ने सहमति जताते हुए याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा।
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गोवर्धन में सभी रोड का काम जल्दी पूरा करवाया कराने के लिए डीएम मथुरा को निर्देश दिए। प्रदेश सरकार के अधिवक्ता पिंकी आनंद को न्यायालय ने सरकार की तरफ से रोड निर्माण के लिए पैसा देने में हो रही देरी के बारे में त्वरित कार्यवाही करवाने को कहा। पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर को अगली तारीख पर मौजूद रहने के आदेशित किया। 

इसके अलावा राजस्थान सरकार की तरफ से मौजूद भरतपुर के डीएम को न्यायालय के बार बार आदेश करने के बाद भी अनुपालन न करने, शपथपत्र न दाखिल करने के लिए 10 हजार का जुर्माने लगाते हुए कहा कि न्यायालय के आदेशों की अवमानना हुई तो अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही के आदेश पारित होंगे। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी।
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