यमुना को मूलस्वरूप में लाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। इसको मैली करने वालों की जांच के लिए कमेटी भी बना दी है। इससे नगर निगम में हड़कंप मचा हुआ है। अपनी करतूतों को छिपाने के लिए नगर निगम ने ताजमहल के पीछे टेनरी के आस-पास युद्ध स्तर पर सफाई कार्य शुरू कर दिया है। गुरुवार को दर्जनों कर्मचारियों (लाल सेना) ने कचरा एकत्र कर ट्रकों के माध्यम से हटाया। सफाई कार्य अभी जारी रहेगा।
बता दें, एनजीटी की बनाई कमेटी जिले में जांच करेगी कि यमुना को कहां और कौन मैली कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, यह टीम जिले में जांच के लिए जल्द आ सकती है। बुधवार को मोक्षधाम मामले में जांच करने आए सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता विजय पंजवानी ने भी यमुना की गंदगी की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करने की चेतावनी दी है। गुरुवार को नगर निगम के अधिकारियों ने करीब 90 कर्मचारियों की टीम को यमुना किनारे उतार दिया है। पहले मोक्षधाम के आसपास सफाई की गई उसके बाद ताजमहल के पीछे दशहरा घाट से टेनरी की ओर सफाई अभियान चलाया गया। नगर निगम के कर्मचारी कचरे को एकत्र कर ट्रैक्टरों के माध्यम से हटा रहे हैं। वहां तैनात चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह ने बताया कि सफाई कार्य कई दिन चलेगा।
दिखावा कर रहा नगर निगम
नगर निगम के सफाई अभियान पर पर्यावरणविद् डीके जोशी ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नगर निगम सफाई के नाम पर दिखावा कर रहा है। उन्होंने बताया कि कोल्हाई में बना जल निगम का सीवर ट्रीटमेंट प्लांट कारगर नहीं है। इसमें एक नहीं बल्कि आसपास के करीब छह नालों का पानी आता है। लगभग चार लाख की आबादी का सीवेज यहां आ रहा है। शांति मांगलिक अस्पताल के आस-पास की कालोनियों का पानी इसी नाले में आता है। जल निगम की लापरवाही का आलम यह है कि एसटीपी बंद रहती है। इसकी वजह से बिना शोधित नाले का पानी यमुना में मिल रहा है। यहां सफाई अभियान तब तक सफल नहीं होगा जब तक पूर्वी गेट नाले का कोई समाधान नहीं किया जाए।
बिना जेसीबी नहीं होगी सफाई
ताजमहल के पास यमुना नदी में सिल्ट और कचरा की काफी मोटी परत जमा हो गई है। निगम कर्मी भी इस ओर जाने से घबरा रहे हैं। वर्षों से जमा इस कूड़े को हटाने में नगर निगम के ट्रैक्टर कारगर नहीं हैं। गुरुवार को सफाई अभियान के दौरान ट्रैक्टर कीचड़ में फंस गए। इन्हें निकालने के लिए जेसीबी की मदद ली गई। बिना जेसीबी के यहां से गंदगी नहीं हटाई जा सकती।
ताजमहल को प्रभावित कर रहे नाले
सुप्रीम कोर्ट मानीटरिंग कमेटी के सदस्य और पर्यावरणविद् डीके जोशी का कहना है कि ताजमहल के पीछे गंदगी, पूर्वी गेट और पश्चिमी गेट पर नालों की गंदगी से ताजमहल पर असर हो रहा है। गंदगी से मीथेन गैस उठती है, जिससे ताजमहल के संगमरमर पत्थरों पर प्रभाव पड़ता है। वहां से उठने वाली बदबू पर्यटकों को भी विचलित करती है।