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सर्द रात में बिटिया को लावारिस छोड़ते हुए नहीं कांपे 'अपनों' के हाथ, कूड़े के ढेर में बिलखती मिली

Sat, 19 Jan 2019 11:16 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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नवजात बच्ची - फोटो : अमर उजाला
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आगरा में एक बिटिया को जन्म लेने के कुछ घंटों बाद ही मां की गोद की जगह सर्द रात में कूड़े के ढेर में बिलखता हुआ छोड़ दिया गया। अपनों का दिल तो नहीं पसीजा, लेकिन सुबह उसके रोने की आवाज सुनकर लोग जुट गए। 

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किसी ने दुलार किया तो किसी ने मासूम को गोद में उठा लिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने बच्ची को चाइल्ड लाइन के सुपुर्द किया। बाद में चाइल्ड लाइन ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण कराने के बाद राजकीय बाल गृह (शिशु सदन) में आश्रय दिलाया।

ईदगाह कटघर में कूडे़ का ढेर लगा हुआ है। बच्ची भी इसी ढेर में पड़ी हुई मिली। वो नए कपड़े पहने हुए थी। कंबल भी लिपटा हुआ था। एक दुकानदार ने शुक्रवार की सुबह उसके रोने की आवाज सुनी। कुछ ही देर में लोग जुट गए। 

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...तो बेटी होने की मिली सजा

लोगों ने बच्ची को गोद में उठा लिया। बाद में पुलिस को सूचना दे दी। सूचना पर चाइल्ड लाइन के सदस्य भी आ गए। समन्वयक ऋतु वर्मा ने बताया कि बच्ची को लाने के बाद स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। 

चिकित्सक ने बच्ची पांच दिन की बताई। उसकी नाल भी नहीं कटी है। इसके बाद बाल कल्याण समिति के समक्ष लाया गया। इसके बाद बच्ची को शिशु सदन में आश्रय दिलाया गया है। 

चाइल्ड लाइन समन्वयक ऋतु वर्मा का कहना है कि बच्ची पांच दिन पहले पैदा हुई है। वो नए कपड़े पहने हुए हैं। उसे छोड़ने से पहले कंबल में लपेटा गया है। आशंका है कि नवजात को बेटी पैदा होने की सजा मिली है। क्योंकि उसे कहीं रखने के बाद छोड़ा गया है।

वर्ष 2018 में पांच बच्चे मिले, तीन की मौत

शहर में लगातार नवजात बच्चों के मिलने के मामले सामने आ रहे हैं। वर्ष 2018 में पांच बच्चे सदर, रकाबगंज, ताजगंज, लोहामंडी और हरीपर्वत क्षेत्र में मिल चुके हैं। इनमें चार बच्ची और एक बच्चा था। इनमें से दो बच्ची और एक बच्ची की मौत हो चुकी है। दो बच्ची अभी भी शिशु गृह में रखी गई है।

चाइल्ड लाइन की समन्वयक ऋतु वर्मा ने कहा कि शहर में कई बार नवजात बच्चे मिल चुके हैं। ज्यादातर मामलों में बच्चियों को घर में बेटियां ज्यादा होने की वजह से छोड़ने की बात सामने आती है।
 
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तीन महीने बाद वेबसाइट पर डाला जाता है डेटा

राजकीय बाल गृह की अधीक्षिका उर्मिला गुप्ता के मुताबिक अनाथ बच्चों को गोद लेने के लिए कारा की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन कराना होता है। इसके बाद एजेंसी के माध्यम से तीन बार गोद लेने वाले आवेदक के घर का निरीक्षण किया जाता है। 

इसमें परिवार और गोद लेने वाले दंपती से संबंधित तमाम जानकारी ली जाती है। इसके बाद बच्चे और आवेदक पति-पत्नी की स्वास्थ्य परीक्षण रिपोर्ट और सामाजिक स्टडी की जाती है। एजेंसी कर्मियों की घर में विजिट के लिए फीस देनी होती है। 

यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद कोर्ट में कागजी प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके बाद कोर्ट के समक्ष बच्चे और दंपती को ले जाया जाता है। कोर्ट बच्चे की सुपुर्दगी पर फैसला लेता है। आवेदन कर्ता को फीस भी देनी होती है। दो साल तक बच्चे के बारे में संस्था की ओर से जानकारी ली जाती है।
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