मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस (एमडीआर) टीबी से अब सीधे मुकाबले की तैयारी है। लेटेस्ट तकनीक सीबी-नैट (कार्टिरेज बेस्ड न्यूक्लिक एसिड एम्फ्लिकेशन टेस्ट) से महज तीन घंटे में इसकी जांच होगी। साथ ही किस दवा से स्थिति बनी इसकी भी सटीक जांच हो सकेगी। रिपोर्ट आते ही तुरंत इलाज शुरू हो सकेगा। खास बात ये कि जांच सुविधा जल्द चुनिंदा सरकारी केंद्रों पर नि:शुल्क मिलेगी। दरअसल पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के तहत भारत सरकार ने जर्मनी से 300 मशीन खरीदी हैं। सबसे ज्यादा 39 उत्तर प्रदेश के खाते में हैं। आगरा में राष्ट्रीय जालमा कुष्ठ रोग संस्थान और उप्र टीबी ट्रेनिंग एंड डेमोस्ट्रेशन सेंटर (अमेरिकी सेंटर) में जांच होगी। अलीगढ़ के अलावा मथुरा और मैनपुरी के जिला अस्पताल में भी एक-एक मशीन लगेगी। जांच की ट्रेनिंग 26 नवंबर से आगरा के उप्र टीबी ट्रेनिंग एंड डेमोस्ट्रेशन सेंटर में शुरू हो रही है। दो दिवसीय कैंप में प्रदेश के 37 और उत्तराखंड के तीन जिलों के क्षय अधिकारी समेत 50 विशेषज्ञ शामिल होंगे। एडिशनल डिप्टी डायरेक्टर जनरल टीबी डा. वीएस सल्होत्रा भी रहेंगे।
तकनीकी से ये मिलेंगे लाभ:
- अभी तक पुरानी तकनीकी सोलिड कल्चर (तीन महीने में जांच), लिक्विड कल्चर (25 दिन) और लाइन प्रोब ऐसे (तीन दिन से अधिक) से जांच की जा रही थी। रिपोर्ट देर में मिलने से इलाज भी प्रभावित होता था। अब तीन घंटे में रिपोर्ट आने के बाद सेंटर, ईमेल से भी संबंधित जिले में रिपोर्ट करेंगे।
ऐसे निपटेंगे एमडीआर चुनौती से
- टीबी मुक्त भारत अभियान में एमडीआर मरीज चुनौती बने हुए हैं। प्रदेश में 9163 एमडीआर मरीज हैं। आगरा में 444 एमडीआर और कुल 4866 मरीज हैं। अभी प्रदेश में महज 13 स्थानों पर ही एमडीआर जांच की सुविधा है।
अन्य स्थानों पर इस तकनीकी से जांच शुरू होने बाद संबंधित जिले में सात दिन तक विशेषज्ञों की निगरानी में मरीजों का इलाज चलेगा। इसके बाद उसके घर पर जाकर भी रोजाना मानीटरिंग होगी। बता दें कि इलाज बीच में छोड़ने या फिर नियमित दवा न लेने से टीबी के मरीज पर दवाओं का असर नहीं होता, जिसे एमडीआर मरीज कहते हैं।