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Mainpuri News: एक महीने में निमोनिया से पीड़ित सात बच्चों की मौत, जिले में नहीं उचित उपचार की व्यवस्था

Thu, 24 Nov 2022 07:30 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी

सार

जिले में निमोनिया की रोकथाम के लिए अभी तक कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। पीएचसी और सीएचसी पर जहां बच्चों का उपचार रामभरोसे हैं वहीं जिला अस्पताल में भी उपचार के नाम पर खानापूरी की जा रही है।
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जिला अस्पताल में मरीजों की जांच करते डॉक्टर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सर्दी की शुरुआत होते ही बच्चों में निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है। मैनपुरी जिले में इस माह निमोनिया से पीड़ित सात बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि जिला अस्पताल से 25 बच्चे रेफर किए गए हैं। लेकिन जिले में बच्चों के उपचार की उचित व्यवस्था नहीं है। जिला अस्पताल में दोपहर दो बजे के बाद बाल रोग विशेषज्ञ नहीं बैठते हैं। वहीं, सौ शैया अस्पताल में एक साल से अधिक उम्र के बच्चों को भर्ती करने की व्यवस्था नहीं है।
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जिले में निमोनिया की रोकथाम के लिए अभी तक कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। पीएचसी और सीएचसी पर जहां बच्चों का उपचार रामभरोसे हैं वहीं जिला अस्पताल में भी उपचार के नाम पर खानापूरी की जा रही है। लोग मजबूरी में लोग झोलाछापों से उपचार करा रहे हैं।

एक साल के बच्चों को करते भर्ती

जिले में बच्चों के लिए मातृ और शिशु सौ शैया अस्पताल संचालित हो रहा है। लेकिन यहां एक मात्र बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती होने के कारण यहां एक साल से अधिक उम्र के बच्चों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। जबकि निमोनिया पांच साल तक के बच्चों को अपनी चपेट में ले सकता है। ऐसे में अन्य बच्चों के तीमारदार झोलाछापों से उपचार करा रहे हैं।
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जिला अस्पताल में दो बजे के बाद नहीं मिलते डॉक्टर

जिला अस्पताल की बात करें तो यहां भी बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में एक मात्र डॉक्टर डीके शाक्य की तैनाती है। डॉक्टर डीके शाक्य आठ बजे से दो बजे तक ओपीडी करते हैं। गंभीर मरीजों को उनके द्वारा भर्ती किया जाता है। लेकिन दो बजे के बाद बाल मरीजों को देखने के लिए जिला अस्पताल में कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं होता है। इसके चलते लोग अपने बच्चों को यहां से रेफर करा रहे हैं।

सीएमएस डॉ. मदनलाल ने बताया कि अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है। एक मात्र बाल रोग विशेषज्ञ से उपचार दिलाया जा रहा है। भर्ती मरीज की यदि हालत चिंताजनक होती है तो कॉल भेजकर डॉक्टर को बुलाने की व्यवस्था है।
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