ड्यूटी पर आगरा निवासी नाैसेना के जवान की माैत हो गई। घटना से परिवार में कोहराम मच गया। सैन्यकर्मी की दो नवंबर को शादी हुई थी। पत्नी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
आगरा के मलपुरा क्षेत्र के गांव गामरी निवासी नौसेना के जवान अभिषेक कुमार (28) की शुक्रवार को मुंबई में मौत हो गई। वह अप्रैल 2020 में भारतीय नौसेना में भर्ती हुए थे। मुंबई के कोलाबा में तैनात थे। शनिवार को दिन में करीब तीन बजे तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो परिजन बिलख पड़े।
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जवान के अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। शाम करीब छह बजे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। परिजन के मुताबिक अभिषेक कुमार ने बृहस्पतिवार की शाम को मां सुनीता देवी, पिता लाखन सिंह और पत्नी रेनू उर्फ भावना से बात की थी। पिता से दवा लाने की बात कही थी।
17 नवंबर को ही अभिषेक छुट्टी खत्म होने पर ड्यूटी पर गए थे। पत्नी से जल्द आने की बात कही थी। पिता लाखन सिंह ने बताया कि उन्हें मुंबई से सूचना मिली थी कि उनके बेटे की तबीयत खराब हुई है। इसके बाद मौत की सूचना मिली तो पैरों तले जमीन खिसक गई।
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मुंबई से पार्थिव शरीर के साथ आए लेफ्टिनेंट कमांडर नितिन वशिष्ठ ने बताया कि हर रोज की तरह अभिषेक आईएनएस पर ड्यूटी दे रहे थे। तभी उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया, लेकिन जान नहीं बचाई जा सकी।
पत्नी भावना, पिता लाखन सिंह, बहन स्नेहा और सोनम, मां सुनीता देवी सहित पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। चचेरे भाई सचिन ने मुखाग्नि दी। मौके पर श्याम एस कुमार, राजीव यादव, भास्कर कुशवाहा, रालोद के जिलाध्यक्ष गोविंद शर्मा, बच्चू सिंह, मनजीत फौजी, चौधरी भीमसेन, सुनील कुमार, नेत्रपाल सिंह, कमल सिंह आदि ने श्रद्धांजलि दी।
घर का इकलौता चिराग था अभिषेक
अभिषेक अपने परिवार में तीन भाई-बहनों में बीच के थे। उनकी दो बहनें हैं। परिवार में वह इकलौते पुत्र और माता-पिता के एकमात्र सहारा थे। उनकी मौत से परिजन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव में शोक की लहर है।
2 महीने में ही छूट गया पति का साथ
अभिषेक की शादी एक नवंबर को थाना कागारौल क्षेत्र के गांव बीसलपुर निवासी अमर सिंह की 22 वर्षीय पुत्री रेनू उर्फ भावना के साथ हुई थी। पति के निधन की सूचना मिलते ही पत्नी रेनू का रो-रोकर बुरा हाल है। उसकी तबीयत भी खराब हो गई है। परिजन ने बताया कि शादी को अभी दो महीने भी पूरे नहीं हुए थे। हाथों की मेहंदी भी पूरी तरह नहीं उतरी थी कि रेनू का सुहाग उजड़ गया।