नवरात्र में व्रत का सामान भी इस बार काफी महंगा है। दो महीने के भीतर किराने से लेकर फलों पर डेढ़ गुना तक इजाफा कर दिया गया है। हालांकि थोक बाजार के भावों में अधिक फर्क नहीं आया है। कई समान पर तो कीमतें कम ही हुई हैं। खुदरा विक्रेताओं ने मौके को देखते हुए दामों में इजाफा कर दिया है।
नवरात्र में भक्त पूजा से लेकर उपवास तक के लिए अलग वस्तुओं का प्रयोग करते हैं। जिसमें गोला, कुट्टू और सिंघाड़े का आटा, लौंग के अलावा फल शामिल होते हैं। नौ दिन किसी न किसी रूप में आवश्यकता पड़ती है। लगभग हर त्योहारों से पूर्व सामान को महंगा कर देने की कहानी शुरू हो जाती है। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है।
पहले - और - अब
गोला 125-- 150
कुट्टू का आटा 65-- 80
सिंगाड़ा आटा 70-- 80
लौंग 480-- 450
गुग्गल 500-- 400
चंदन चुरा 140-- 140
हवन सामग्री 200 -- 300
छुआरा 200 --220
मखाना 500-- 400
बादाम मिंगी 550-- 660
किशमिश 200-- 250
चिरौंजी 900 -- 950
कमल गट्टे 150 --125
पीली सरसों 60-- 70
काले तिल 70-- 60
समा चावल 60-- 45
साबूदाना 60 --45
कपूर 900--1100
सभी दाम प्रति किलो में
हवन की लकड़ी 12-- 15 रुपये प्रति नग
फुटकर भाव:
गोला - 200
कुट्टू का आटा - 120
सिंगाड़ा आटा - 120
लौंग - 550
गुग्गल - 500
चंदन चुरा- 200
हवन सामग्री- 400
छुआरा- 280
मखाना- 650
बादाम मिंगी- 800
किशमिश- 400
चिरौंजी- 1200
कमल गट्टे- 180
पीली सरसों- 120
काले तिल- 100
समा चावल- 65
साबूदाना- 70
कपूर- 1400
सभी दाम प्रति किलो में
हवन की लकड़ी 25 रुपये प्रति नग
फलों के थोक और फुटकर:
केला- 17 - 45
सेब - 25 - 65
पपीता - 25 - 65
अनार - 50- 120
मौसमी - 30 - 60
दाम प्रतिकिलो
किराने की थोक कीमतों में ज्यादा फर्क नहीं
आगरा किराना संघ के अध्यक्ष रमेश कल्याणी ने कहा कि किराने की थोक कीमतों में बहुत अधिक फर्क नहीं आया है। बल्कि कई सामान के दाम तो कम ही हैं। क्योंकि लॉकडाउन के कारण काफी सामान अभी भी रखा हुआ है। फुटकर बाजार में जरूर दाम बढ़ा दिए गए हो।
फलों के आवक में कोई कमी नहीं आई
थोक फल मंडी सिकन्दरा के अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा कि फलों के थोक भावों में कोई महंगाई नहीं है। आवक में भी कोई कमी नहीं आई है। इसलिये कीमतें सामान्य ही हैं।
प्रशासन को रखना चाहिए ध्यान
गृहिणी भाविका ने कहा कि कोई भी त्योहार हो मौका देखते ही विक्रेता सामान पर कृत्रिम महंगाई कर देते हैं। प्रशासन भी ऐसे विक्रेताओं पर नजर नहीं रखता है।
मजबूरी का उठाते हैं फायदा
गृहिणी कृष्णा ने कहा कि हर कोई थोक बाजार नहीं जा सकता है। इसलिए मजबूरी का फायदा उठाकर सामान महंगा कर दिया जाता है। प्रशासन को इस पर नजर बनाए रखनी चाहिए।