उन्होंने मैनपुरी-कुरावली रोड पर मां आद्या शक्ति की मूर्ति को विराजमान कराने के लिए भव्य मंदिर का निर्माण कराया। इसमें कड़ा स्थित आद्या शक्ति की ऐसी कलात्मक प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठित कराई, जो तत्कालीन मूर्तिकला, शिल्पकला, वास्तुकला और पुरातात्विक दृष्टिकोण से मूल्यवान कृति रही है।
बुजुर्ग बताते हैं कि 16वीं शताब्दी में जनपद एवं आसपास के स्थलों में बड़ी चेचक और खसरे का गंभीर प्रकोप हुआ तो मां आदिशक्ति की ख्याति के कारण जनसमुदाय ने देवी मां का जप और आराधना की। यह रोग उनकी भस्म और असीम कृपा से दूर हो गया। चूंकि इस रोग में गर्मी की अधिकता रहती है, उससे शीतलता प्रदान करने वाली शक्ति का नाम शीतला देवी के रूप में ख्याति प्राप्त हो गया। यहां नेजा चढ़ाने की भी पुरानी परंपरा है।
ऐसे पहुंचे शीतला देवी मंदिर
- घंटाघर चौराहे से देवी रोड पर दो किमी दूर
- ईशन नदी पुल से कुरावली रोड पर दो किमी दूर
- सिंधिया तिराहे से ज्योंती बाईपास रोड होते हुए तीन किमी
- करहल चौराहे से ईसन नदी पुल होते हुए पांच किमी