मैनपुरी। नवोदय में कथित छात्रा हत्याकांड का राजफाश करने के लिए एसआईटी ने पॉलीग्राफी टेस्ट को हथियार बनाया था। जांच के दौरान दूसरी बार पॉलीग्राफी टेस्ट कराने के लिए एसआईटी ने अनुमति ली थी लेकिन अब तक इनका पॉलीग्राफी टेस्ट नहीं कराया जा सका है।
तीन दिन पहले 12 दिसंबर को एसआईटी ने तत्कालीन प्रधानाचार्य उनके पति व पुत्र के साथ ही छात्रा के कुछ परिजनों समेत सात लोगों का पॉलीग्राफी टेस्ट कराने के लिए कोर्ट से अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने टेस्ट के दौरान वकील के मौजूद रहने की शर्त के साथ अनुमति दे दी थी लेकिन तीन दिन के बाद भी अब तक इन लोगों का पॉलीग्राफी टेस्ट नहीं कराया गया है। सवाल ये है कि इतने गंभीर मामले में एसआईटी कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद भी क्यों देरी कर रही है। हालांकि एसआईटी के अधिकारी इस बारे में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
पांच लोगों का हो चुका है पॉलीग्राफी
सबसे पहले एसआईटी ने नवोदय छात्रा हत्याकांड में पॉलीग्राफी कराने का ही निर्णय लिया था। इसमें पांच लोगों को पॉलीग्राफी टेस्ट करने के लिए भेज दिया गया था लेकिन बिना कोर्ट की अनुमति के चलते उन्हें लौटा दिया गया था। बाद में कोर्ट से अनुमति के बाद तीन छात्र व दो शिक्षकों का पॉलीग्राफी टेस्ट हो सका था।