शहर की आबोहवा में जहर घुला हुआ है। यमुना नदी का पानी न सिंचाई लायक है और न ही ताजनगरी की हवा सांस लेने लायक। साल दर साल शहर की वायु गुणवत्ता बद से बदतर होती जा रही है, वहीं यमुना नदी में सीवर गिरकर नाले में तब्दील कर चुका है।
राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस आज है, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण के लिए 15 से ज्यादा कानून और आगरा के लिए विशेष एयर एक्शन प्लान और रिवर एक्शन प्लान बना होने पर भी जमीन पर हालात नहीं सुधरे। डेढ़ साल पहले बने दोनों एक्शन प्लान कागजों में हैं और शहर के 20 लाख से ज्यादा लोग जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं।
धुएं में निकलता युवक
- फोटो : अमर उजाला
नवंबर के महीने में दिवाली से पहले और तीसरे सप्ताह में प्रदूषण स्तर बेहद खतरनाक स्तर पर रहा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक नवंबर में 4 दिन हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में, 13 दिन बेहद खराब श्रेणी में और 9 दिन खराब श्रेणी में रही।
इस तरह 26 दिन तक हवा में जहर खतरनाक स्तर तक घुला रहा। केवल 4 दिन हवा की गुणवत्ता औसत रही, हालांकि सांस लेने लायक फिर भी नहीं रही।
पांच साल में बढ़ रहा प्रदूषण स्तर
साल बोदला नुनिहाई
2016 137 138
2017 160 193
2018 169 186
2019 154 210
2020 163 240
आगरा में छाई धुंध
- फोटो : अमर उजाला
पिछले साल बेहतर थी नवंबर की हवा
बीते साल 2019 में शहर में न सीवर-पानी की लाइनों की खोदाई ज्यादा थी और न ही सड़क पर जाम था। ऐसे में हवा की गुणवत्ता पूरे महीने (नवंबर) ठीक रही। बीते साल नवंबर में 6 दिन तक हवा की गुणवत्ता सांस लेने लायक और अच्छी रही। 12 दिन एयर क्वालिटी इंडेक्स बेहतर रहा और 11 दिन हवा खराब श्रेणी में रही। केवल एक दिन ही वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद खराब श्रेणी में पहुंचा, जबकि इस साल 13 दिनों तक बेहद खराब श्रेणी रही।
धूल में उड़ाया प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का जुर्माना
धूल के गुबार उड़ने पर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आगरा स्मार्ट सिटी, एडीए और जलनिगम पर 32 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, लेकिन सरकारी विभागों ने धूल नियंत्रण के उपाय फिर भी नहीं किए। जुर्माना लगने के बाद भी एयर एक्शन प्लान में सरकारी विभागों ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई, जबकि शहर की हवा की गुणवत्ता पूरे महीने में 26 दिन तक खराब स्तर पर बनी रही। आरटीओ, नगर निगम, जलनिगम, एनएचएआई ने अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभाईं।
यमुना नदी
- फोटो : अमर उजाला
कैलाश घाट से ताज तक 4 गुनी मैली कर दी यमुना
कैलाश घाट पर यमुना जल के सैंपल और ताजमहल के पीछे दशहरा घाट के सैंपल की रिपोर्ट में चार गुना तक प्रदूषण मिला है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा प्रदूषण ताजमहल के पीछे दशहरा घाट पर है।
प्रदेश में मथुरा के डाउन स्ट्रीम के बाद यमुना नदी ताजमहल के पीछे दूसरी सबसे प्रदूषित स्थिति में है। घुलनशील ऑक्सीजन से लेकर कोलीफ़ॉर्म तक की मात्रा में चार गुना ज्यादा प्रदूषण मिला है।
शहर के 91 नाले यमुना में टैपिंग के बिना सीधे गिर रहे हैं, जिनसे 40 एमएलडी सीवर सीधे यमुना में पहुंच रहा है, वहीं सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और पंपिंग स्टेशनों के पूरी क्षमता से काम न करने से यमुना गंदे नाले जैसी स्थिति में पहुंच गई है, जिसका पानी सिंचाई लायक भी नहीं है।
आगरा किले के सामने कचरे से निकलता धुआं
- फोटो : अमर उजाला
कैलाश घाट पर यमुना के हालात
माह डीओ बीओडी टोटल कॉलीफार्म फीकल कॉलीफार्म
जनवरी 4.7 11.6 38,000 22,000
फरवरी 4.7 11.6 33,000 18,000
मार्च 5.4 13.2 52,000 21,000
अप्रैल 6.3 9.6 33,000 13,000
मई 7.8 8.4 33,000 13,000
जून 7.1 9.2 34,000 16,000
जुलाई 7.2 11.6 32,000 11,000
अगस्त 5.9 11.2 31,000 15,000
सितंबर 6 12 31,000 11,000
ताजमहल के पीछे यमुना में गंदगी (फाइल)
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ताजमहल पर यमुना के हालात
माह डीओ बीओडी टोटल कॉलीफार्म फीकल कॉलीफार्म
जनवरी 3.9 14.8 1,10,000 35,000
फरवरी 4 16.4 1,10,000 44,000
मार्च 5.1 14.4 1,10,000 46,000
अप्रैल 5.4 11.2 89,000 52,000
मई 7.1 10 79,000 46,000
जून 5.6 11.6 78,000 43,000
जुलाई 6.3 15.8 70,000 28,000
अगस्त 4.8 15.2 92,000 37,000
सितंबर 5.5 14.4 42,000 27,000