नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने आगरा में यमुना नदी को प्रदूषित करने के मामले में सात आवासीय कालोनियों के खिलाफ जारी जमानती वारंट को रद करते हुए आरडब्ल्यूए (रेंजीडेंशियल वेलफेयर एसोसिएशन) अध्यक्षों को राहत दी है। ग्रीन पैनल ने सभी को एक हफ्ते में जवाब दाखिल करने की मोहलत दी है।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई की। मालूम हो कि ग्रीन बेंच के सामने सभी सात कालोनियों के आरडब्ल्यूए अध्यक्ष हाजिर हुए। उन्होंने ग्रीन बेंच से प्रार्थना की कि जारी जमानती वारंट रद कर दिया जाए। इसके बाद ग्रीन पैनल ने निर्देश जारी किया है।
इनके खिलाफ था जमानती वारंट
मालूम हो कि यमुना में बिना शोधित सीवेज डिस्चार्ज करने के मामले में इंद्रधनुष कालोनी, संत नगर कालोनी, जयराम बाग कालोनी, राहुल विहार, अमर विहार, मैत्री बाग, फ्रेंड्स विहार कालोनी को कारण बताओ नोटिस के बाद जमानती वारंट जारी किया गया था।
सिंचाई विभाग से मांगी है रिपोर्ट
इसके अलावा एनजीटी ने उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग को आगरा में यमुना डूब क्षेत्र के भौतिक तौर पर सीमांकन और डूब क्षेत्र में आने वाले प्रोजेक्ट को लेकर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश काउंसिल ने कहा कि इस संबंध में मैप एनजीटी को दिया जा चुका है। बीते 25 वर्षों में 2010 में बाढ़ अपने उच्चतम स्तर पर पहुंची थी। इसके कारण कई कालोनियां और प्रोजेक्ट प्रभावित हुए थे। इसके बाद एनजीटी ने प्रभावित होने वाले कालोनियों और प्रोजेक्ट की सूची मांगी थी।