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'आकाश' छूने की कोशिश में गुब्बारों वाली 'परियां', भावुक कर देगी इनकी कहानी

Thu, 24 Jan 2019 02:16 PM IST
दुष्यंत शर्मा अंकित गुप्ता, अमर उजाला, आगरा
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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जिस समाज में आज बेटियों को लेकर बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, उसी समाज पर मासूम बच्चियों की यह तस्वीर न सिर्फ सवाल खड़ा कर रही है, बल्कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे नारों के खोखलेपन को भी दर्शाती है। 
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ताज नगरी में हर रोज कुछ नन्हीं आशाएं रंग-बिरंगे गुब्बारों की उड़ान से अपने हिस्से का आकाश नापने का प्रयास करतीं हैं। इन्हें नन्हें कंधों पर न सिर्फ अपनी जिम्मेदारी उठाती हैं बल्कि अपने परिवार के गुजारे में भी हिस्सेदारी करतीं हैं। 

ये बेटियां गरीब हैं पर मजबूर नहीं, खुद्दारी का आलम यह कि बुधवार को कार में बैठे एक साहब ने बख्शीश देनी चाही तो नौ साल की बच्ची ने यह कहते हुए इंकार कर दिया कि गुब्बारा खरीदो तभी वह पैसे स्वीकार करेगी। 
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ट्रैफिक रुकते ही सड़कों पर दिखतीं यह बेटियां  

जैसे ही ट्रैफिक का सिपाही हाथ देकर गाड़ियों को रुकने का इशारा करता है। वैसे ही आठ से दस साल की बेटियां हाथों में गुब्बारे लिए गाड़ियों के पास पहुंच जातीं हैं। गाड़ी के शीशे पर टकटक कर गुब्बारे खरीदने की गुहार लगातीं है। यह उनका रोज का काम है। 

शहर के अलग अलग चौराहों पर इन दिनों यह तस्वीर आम हो चली है। अच्छी बात यह है कि यह छोटी छोटी बच्चियां गुब्बारे या किसी अन्य सामान को देकर ही रुपये लेतीं है। किसी की ओर से बिना सामान लिए अगर रुपये दिए जाते हैं तो वह मना कर देतीं है। 

गुब्बारा बेचने वाली बच्ची से जब पूछा कि पिता कहां हैं तो उसने कहा कि पता नहीं, मां कहां है, गुब्बारे बना रही। कितने रुपये कमा लेती हो, बिक जाते हैं दस-बीस गुब्बारे। कितने का है गुब्बारा, दस रुपये का साहब।
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समझदार और खुद्दार

वो बताती है कि यह काम वह मां की मदद करने के लिए करती है। उसका एक छोटा भाई भी है। वह मां के पास ही रहता है, वह जब रुपये लेकर जाती है तभी खाने का जुगाड़ हो पाता है। 

पढ़ाई के सवाल पर वो चुप हो गई, फिर बोली भाई को पढ़ाऊंगी। सड़क किनारे कहीं भी डेरा जमा कर रहने वाली यह दस साल की बालिका मां के साथ अपनों के लिए सब अच्छा करने का प्रयास कर रही है। 

राधिका ही नहीं, न जाने कितनीं बेटियां 'अपराजिता' बन जिंदगी से लड़ रही हैं। राष्ट्रीय बालिका दिवस पर यह प्रश्न और प्रासंगिक हो जाता है कि दो घरों में उजाला करने वाली इन रोशनियों की खुद की जिंदगी मे उजाला कब आएगा। 
 
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