नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) के निशाने पर अब जिला स्तर के खिलाड़ी भी होंगे। खेल के दौरान प्रतिबंधित दवाओं और स्टेरायड का सेवन करना इन्हें भारी पड़ सकता है। अगर, कोई खिलाड़ी डोपिंग के मामले में फंसता है तो उसके भविष्य पर इसी स्तर पर पूर्ण विराम लग सकता है।
अब तक नाडा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों पर नजर रखती आई है, लेकिन अब जिला एवं प्रदेश स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने वाले खिलाड़ियों पर भी नजर रखी जाएगी।
शक या शिकायत के आधार पर उनका डोप टेस्ट कराया जाएगा। जिला स्तर पर खिलाड़ियों की जांच करने के फैसले को मिनिस्ट्री ऑफ यूथ अफेयर्स का भी साथ मिलने की उम्मीद है क्योंकि मंत्रालय नाडा का बजट बढ़ाने की तैयारी में है। ऐसे में जिला और प्रदेश स्तर के खिलाड़ियों का भी डोप टेस्ट कराना आसान हो जाएगा।