कासगंज के सोरोंजी में तुलसीदास जी के गुरू नर हरि पाठशाला का जीर्णोधार में लगे श्रमिक।
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सोरोंजी। रामचरितमानस के रचनाकार तीर्थनगरी में जन्मे महाकवि गोस्वामी तुलसीदास की पाठशाला काफी प्राचीन है। उनकी पाठशाला का जीर्णोद्धार तुलसीदास के गुरु नरहरिदास की बीसवीं पीढ़ी के वंशज योगेश चौधरी के निर्देशन में राजस्थान की महुआ तहसील के ग्राम पाखड़ निवासी श्रद्धालु महेश, हरीश, विनोद, प्रह्लाद, संजय के द्वारा जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। इससे तीर्थनगरी के बाशिंदों में हर्ष है।
पाठशाला में गुरु नरहरिदास, बालरूप तुलसीदास जी व तुलसीदास के चचेरे भाई अष्टछाप के कवि नंददास की प्रतिमा स्थापित होंगीं। तुलसीदासजी जब इस पाठशाला में पढ़ते थे, तबसे पाठशाला में बाल रूप में हनुमानजी की प्रतिमा विराजमान है। मान्यता है कि आज भी हनुमानजी पाठशाला में विराजित हैं। उनका एक छोटा सा मंदिर बनवाकर उनको वहीं प्रतिष्ठित कर दिया गया है। योगश चौधरी ने बताया कि गुरु नरहरिदास तुलसीदास को संगीत, वेद शास्त्र की शिक्षा दिया करते थे। तुलसीदास के चचेरे भाई नंददास भी उन्हीं के शिष्य थे। तुलसीदासजी ने सर्वप्रथम अपने गुरु नरहरिदास के मुख से ही रामकथा सुनी थी। तुलसीदासजी की जीर्णशीर्ण हो चली प्राचीन पाठशाला का जीर्णोद्धार होने से लोगों में हर्ष है।