शहर में घर से ही कचरा अलग-अलग करने के लिए नगर निगम जो लाल, हरे और नीले डस्टबिन बांट रहा है, उसे पहले फ्री भले ही बताया हो लेकिन अब इनके लिए पैसा देना होगा। हाउस टैक्स की रसीद, आधार कार्ड नंबर लेकर दिए जा रहे तीनों रंग के डस्टबिन के लिए नगर निगम 480 रुपये वसूलेगा। यह धनराशि अगले साल के हाउस टैक्स में जुड़कर आएगी। दुरुपयोग होने की आशंका पर मुफ्त बांटने की मनाही कर दी गई।
नगर निगम शहर के 3.10 लाख घरों में लाल, हरा और नीले रंग के तीन डस्टबिन बांट रहा है। पहले चरण में 30 हजार घरों को डस्टबिन दिए जा रहे हैं। नगर निगम ने तय किया था कि हाउस टैक्स की नई रसीद दिखाने पर तीनों डस्टबिन फ्री बांटे जाएंगे, लेकिन 14 वें वित्त आयोग निधि से खरीदे गए 15 लीटर क्षमता के डस्टबिन को फ्री बांटने से समिति ने इंकार कर दिया।
नगर आयुक्त अरुण प्रकाश ने वर्कशॉप प्रभारी अनुपम शुक्ला और जेडएसओ दयाराम सिसौदिया, इंद्रजीत सिंह को निर्देश दिए हैं कि सेनेटरी इंस्पेक्टरों से उन लोगों की लिस्ट तैयार कराकर लें जिनको डस्टबिन बांटे गए हैं। इस लिस्ट के आधार पर वर्ष 2020-21 के गृहकर बिल में डस्टबिन की राशि 480 रुपये जोड़ी जाएगी।
वित्त आयोग की निधि से खर्च, फ्री नहीं बांट सकते
नगर निगम पहले तीनों डस्टबिन फ्री देना ही चाहता था, लेकिन यह खरीद 14 वें वित्त आयोग निधि से हो रही है। इसलिए फ्री नहीं बांट सकते। फ्री में मिलने वाली चीजों को लोग भी दुरुपयोग करते हैं, इसलिए इसके लिए तय रकम अगले साल के हाउस टैक्स में जोड़कर भेजी जाएगी। -अरुण प्रकाश, नगर आयुक्त
डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन में अलग-अलग कचरा मिले, इसके लिए दिए गए डस्टबिन के पैसे लेना गलत है। जनता से डोर टू डोर के पैसे तो लिए जा रहे हैं।
-धर्मवीर सिंह, पार्षद, रतनपुरा
गृहकर जमा हो, इसलिए प्रोत्साहन के रूप में डस्टबिन रसीद देखकर बांटने की बात हुई थी। डस्टबिन का पैसा लेने का विरोध करेंगे। डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन में इससे सुविधा होगी। -रवि बिहारी माथुर, पार्षद, पीपलमंडी