सोरों (कासगंज)। तन पर भभूत, खान-पान अलग, विचित्र रहन-सहन, विचित्र दुनिया, व्यवहार भी अजीबो-गरीब। जी हां, कुछ ऐसी ही है नागा साधुओं की दुनिया। हवन कुंड की राख की धूनी ही उनका वस्त्र है, हाथ में त्रिशूल और सुलगती चिलम उनकी शान है। देश भर के तमाम नामचीन अखाड़ों के नागा साधू इन दिनों सोरों में डेरा जमाए हुए हैं और शाही स्नान की तैयारियों में जुटे हैं। शाही स्नान के दिन इनके ठाठ-बाट किसी राजा-महाराजा से कम नहीं होंगे।
सोरों के मेला मार्गशीर्ष में नागा साधुओं के शाही स्नान की परंपरा रही है। इस बार 10 दिसंबर को शाही स्नान होगा और नागा साधू शोभायात्रा के रूप में स्याही निकालेंगे। यह स्याही इलाहाबाद, उज्जैन और सोरों में ही निकाली जाती है। इसे शाही सवारी भी कहते हैं। शाही शोभायात्रा में ये नागा साधू करतब दिखाते चलते हैं। माथे पर लंबा तिलक लगाए, भृकुटियां तनी हुईं और बम-बम भोले जयघोष करते साधू किसी सैन्य रेजीमेंट से कम दिखते। शाही स्नान में शामिल होने के लिए देशभर के नागा साधू सोरों में पहुंच गए हैं। सोरों के नागालैंड अखाड़े में इन साधुओं की धूनी रम गई है।
खातिरदारी में जुटे पुरोहित
नागालैंड अखाड़ा में देशभर से पहुंचे नागा साधुओं की खातिरदारी के लिए पुरोहित जी-जान से जुटे हैं। यहां पुरोहित अखाड़े में हर तरह का सहयोग दे रहे हैं। खान-पान और रहन सहन की व्यवस्था भी मेजबान ही कर रहे हैं। हालांकि पालिका की व्यवस्थाएं पूरी तरह संतोषजनक नहीं हैं। कुछ साधू तो पालिका की लापरवाही पर क्रोधित हैं।
1996 से निकलती है स्याही
ब्रह्मलीन नागा साधू महंत सेवागिरी ने बताया कि पूरे भारतवर्ष से नागा साधू एक मंच पर आकर सोरों में हर साल स्याही जुलूस निकालते हैं। 1996 से यह परंपरा जारी है। नागा संत श्रवण ने बताया कि पूरी तीर्थनगरी स्याही के लिए सजधज कर तैयार है। मार्गशीर्ष त्रयोदशी पर स्याही निकालने पर हरिपदी घाट पर स्याही स्नान किया जाएगा।
यह होता है शृंगार
लंगोट, भभूत, चंदन, पैरों में लोहे के कड़े, अंगूठी, पंचकेश, कमर में फूलों की माला, माथे पर रोली का लेप, कुंडल, हाथों में चिमटा, डमरू या कुंडल, गुथी हुई जटाएं, तिलक, काजल, हाथों में कड़े, बाहों में रुद्राक्ष की माला नागा साधुओं का शृंगार होता है।
यहां से आए हैं साधू
पंच दशनाम आवाहन अखाड़ा, सरकार गणपति अखाड़ा बनारस, गणेशगिरी अखाड़ा, जूना अखाड़ा, निरंजनी अखाड़ा हरिद्वार, अटल अखाड़ा, आनंद अखाड़ा, अग्रि अखाड़ा, पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा, खडगदर्शन संप्रदाय, वैष्णव चतुर्थ संप्रदाय सहित विभिन्न अखाड़ों के नागा साधू सोरों पहुंच गए हैं।