जब कमाई लाखों में थी तब आगरा नगर पालिका शहर के लोगों की सेहत का ख्याल रखते हुए 12 अस्पतालों का संचालन कर रही थी। अब जब बजट 800 करोड़ के पार है, तब पीपीपी मॉडल पर बनाए दो हेल्थ सेंटर भी बंद पड़े हैं। 120 साल पहले शहर में नगर पालिका के छत्ता के अस्पतालों में 80 हजार और जीवनीमंडी के अस्पतालों में 68 हजार मरीजों का इलाज किया गया था। तब नगर पालिका तीन अस्पताल, 7 डिस्पेंसरीज और दो मेटरनिटी होम का संचालन करती थी।
नगर निकाय के जानकार राजीव सक्सेना बताते हैं कि आगरा म्यूसिपलिटी के गठन के बाद संक्रामक रोगों के इलाज के लिए पुराने शहर से दूर शाहगंज क्षेत्र में इन्फेक्शियस डिजीजेज हॉस्पिटल (आईडीएच) का निर्माण किया गया जो 50 बेड का था। संक्रामक रोगों के लिए तब यह यूनाइटेड प्राविंस का एकमात्र अस्पताल था, जिसे बाद में गरीबखाना नाम दिया गया। वर्ष 1965 के आगरा गजेटियर के मुताबिक साल 1948 तक गरीबखाने में एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाने का काम चालू रहा, जिसे बाद में एसएन मेडिकल कॉलेज को दे दिया गया। 1956 में भी शाहगंज के गरीबखाना अस्पताल में 32,175 मरीजों को इलाज दिया गया।
नगर निगम ने आगरा स्मार्ट सिटी के सहयोग से शहर में 10 जगह स्मार्ट हेल्थ सेंटर शुरू करने की कवायद वर्ष 2019 में शुरू की, जिनमें नगर निगम के गेट पर और आवास विकास कॉलोनी में एक हेल्थ सेंटर शुरू किया गया, पर यह दोनों भी चल नहीं सके। नगर निगम के गेट पर 50 रुपये में परामर्श और सस्ती दवाएं देने की सुविधा शुरू की जो कोरोना संक्रमण के बाद चल नहीं सकी। नगर निगम परिसर में बनाई गई स्मार्ट पैथोलोजी लैब को भी एक साल के अंदर बंद करना पड़ गया।