फिरोजाबाद। शहर के 15 प्रमुख मार्गों को नगर निगम ने डलाबघर बना दिया है। प्रमुख मार्गों पर डलावघर बन जाने से स्मार्ट सिटी की छवि धूमिल हो रही है। डलावघर की समस्या का निस्तारण के लिए जनप्रिनिधियों से लेकर अफसरों तक से लोग शिकायत कर रहे है। स्थिति यह है कि इन डलाबघरों के समीप से गुजरना काफी मुश्किल भरा हो गया है। वहीं, बीमारियों के फैलने का खतरा भी बना है।
नगर निगम की सीमा में 70 वार्ड है। इन वार्डों की गली मोहल्लों में से प्रतिदिन 283 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। इस कूड़े को चिन्हित किए गए 40 कूड़ेदानों में एकत्रित किया जाता है। कूड़ेदानों से देर शाम तक कूड़ा चनौरा स्थित खत्ताघर पर भेजा जाता है। दिन भर सड़कों पर कूडा पड़ा रहने के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक दिक्कत बजरिया स्थित डलावघर के कारण दुकानदार और बाजार आने वाले लोगों को होती है। क्योंकि यहां से दोपहर तीन बजे के बाद ही कूड़ा उठ पाता है। वहीं मोहल्ला दुली चौराहा पर डलावघर होने से क्षेत्रीय लोगों को दिक्कत होती है। डलावघर के कारण जहां जाम लग जाता है। वहीं दुर्गंध के कारण बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है। सर्विस रोड स्थित पीडी जैन इंटर कॉलेज मैदान के समीप बना डलाव घर से ओवर ब्रिज के नीचे डेरा तंबू लगाकर रह रहे लोग परेशान है तो राहगीरों को दिक्कत हो रही है। रसूलपुर डांक बंगला के समाने देर शाम तक डलाबघर पर कूड़ा डला रहता है। सबसे अधिक दिक्कत मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में है।
- डलाबघरों को खत्म करने के लिए आठ वाहनों को मंगाया जा रहा है। जिससे शहर के प्रमुख स्थानों पर पड़ने वाले कूड़े को वाहन के अंदर एकत्रित करने के साथ ही खत्ताघर भेजा जा सके। एक जून तक वाहनों के आने का इंतजार है। वाहन आते ही समस्या का निस्तारण हो जाएगा।
अतुल पांडेय एक्सईन/ वर्कशॉप प्रभारी
- शहर से निकलने वाला कूड़ा- 283 मीट्रिक टन
- शहर में डलाबघरों की संख्या लगभग- 40
- सफाई व्यवस्था में लगे वाहनों की संख्या लगभग- 80
-सफाई कर्मचारियों की संख्या लगभग -1200