आगरा में विधान परिषद की संसदीय अध्ययन समिति की बैठक में शनिवार को नगरायुक्त नहीं पहुंचे। समिति के सभापति ने उन्हें अपर मुख्य सचिव के समक्ष तलब होने के निर्देश दिए हैं। जहां उन्हें बैठक से अनुपस्थित रहने के साक्ष्य देने होंगे।
सभापति सुरेंद्र चौधरी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति शनिवार को सर्किट हाउस पहुंची। जनप्रतिनिधि, सांसद व विधायकों के पत्रों के निस्तारण की समीक्षा की। लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता की जगह अधिशासी अभियंता बैठक में शामिल हुए। कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्य अभियंता को तलब किया गया।
अन्य गैरहाजिर अधिकारियों से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। पहले फिरोजाबाद और मैनपुरी की समीक्षा की गई। सांसद व विधायकों के पत्रों पर कार्रवाई का ब्योरा तलब किया गया। सभी विभागों को निर्देश दिए कि शिलापट्टिका पर जनप्रतिनिधियों को नाम अंकित कराएं। प्रत्येक कार्यालय में जनप्रतिनिधियों के पत्र व शिकायतों, सिफारिशों का रजिस्टर बनाया जाए।
सभापति ने कहा कि राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य, पंचायतीराज, शिक्षा, लोकनिर्माण, नगर विकास विभाग की सर्वाधिक शिकायतें प्राप्त होती हैं। इसके बाद आगरा की समीक्षा की। सभापति को बताया गया कि आगरा में पिछले तीन साल में जनप्रतिनिधियों के 563 पत्र प्राप्त हुए हैं। सभी पत्रों का निस्तारण किया गया है। ऊर्जा विभाग में सर्वाधिक 258 पत्र प्राप्त हुए।
सभापति ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि एक सप्ताह में अनुपस्थिति अधिकारियों का स्पष्टीकरण भेजें। बैठक में बिना मान्यता के संचालित स्कूल की रिपोर्ट देने, सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने और टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्युत चोरी के विरुद्ध निरंतर छापेमारी की जाए। सीएचसी व पीएचसी पर दवा की उपलब्धता के निर्देश दिए। बैठक में समिति सदस्य धर्मेंद्र सिंह, किरण पाल कश्यप, उमेश द्विवेदी, हंसराज विश्वकर्मा के अलावा डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी, अपर पुलिस आयुक्त राम बदन, डीएफओ आदर्श कुमार आदि मौजूद रहे।