विरह में डूबे शहंशाह के दिल का दर्द शब्दों में ढला तो गजल बनी ‘मुमताज तुझे देखा, जब ताजमहल देखा’। प्रसिद्ध गजल गायक हरिहरन ने जब ताज महोत्सव के मंच से यह गजल गुनगुनाई तो इश्क की मीठी सी चुभन सीधे श्रोताओं के दिल की गहराईयों में उतर गई। किसी बॉलीवुड गायक के उलट शिल्पग्राम के मुख्य मंच पर दर्शक कम थे, लेकिन जो थे, उन पर हरिहरन की आवाज का जादू सिर चढ़कर बोला।
उस्ताद गुलाम मुस्तफा साहब के शिष्य हरिहरन ने ‘हुस्न को चांद जवानी को कमल कहते हैं, देखने वाले तुझे ताजमहल कहते हैं’ मुमताज तुझे देखा, जब ताजमहल देखा’ के जरिए दर्शकों से सीधे दिल का रिश्ता जोड़ लिया। ताज के 350 वर्ष कार्यक्रम में गुलाम अली के साथ किले में प्रस्तुति दे चुके हरिहरन ने कहा कि आगरा में वह चार बार आ चुके हैं। हर बार वह ताज से जुड़े कार्यक्रमों में ही आए हैं। आगरा में क्लासिकल और लाइट म्यूजिक के प्रति श्रोताओं का रुझान बढ़ा है। फ्यूजन को सबसे पहले पेश करने वाले मशहूर पार्श्वगायक हरिहरन ने इसके बाद गजलों से दर्शकों को बांध दिया। ‘पढ़ने नहीं देता मुझे हाथों की लकीरें’ गजल सुनाकर शिल्पग्राम में खुमार ला दिया। लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। उन्होंने ‘मैं भी मेरी अदा मुझको पीकर शराब मस्त हुई’ गाकर लोगों को नशे में डुबो दिया। ‘इस बुलंदी पर आकर तन्हा हूं, काश मैं भी सबके बराबर होता’ गजल गाई तो मौजूद लोग अतीत के झरोखों में झांकते दिखे। गजलों का सिलसिला आगे बढ़ा और देर रात तक चलता रहा।
जगजीत की जगह न ले पाएगा कोई : हरिहरन
आगरा। गजलों का दौर लौट रहा है, लेकिन जगजीत सिंह की जगह कोई भी नहीं ले पाएगा। कहानी की मांग के मुताबिक, गजल फिल्मों में फिट नहीं बैठतीं, इसलिए पर्दे पर भी नहीं दिखाई देतीं, लेकिन गजल के कद्रदान आज भी हैं। यह कहना है प्रसिद्ध गजल एवं पार्श्व गायक हरिहरन का। ताज महोत्सव में तीसरी बार प्रस्तुति देने आए हरिहरन ने खास बातचीत में कहा कि सुकून देने वाला संगीत ही लोगों को पसंद आएगा। बुरे लफ्जों के गीत और कानफोडू़ संगीत ज्यादा दिन नहीं चलता। शास्त्रीय संगीत और गजल को बेशक दर्शक नहीं मिलते, लेकिन जो होते हैं, वही गजल को जिंदा रखे हुए हैं। तू ही रे...रोजा... जैसे गीतों के गायक हरिहरन ने कहा कि हाजिर -2 के बाद वह जल्द ही अपने सूफियाना कलाम पर आधारित नए एलबम को लेकर आएंगे। फिल्मों की जगह वह स्टेज शो कर रहे हैं और देश के कोने-कोने में गजल नाइट पसंद की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि लोकगीत दुनिया भर में छाएंगे। राजस्थान की तरह देश के दूसरेे राज्यों के लोक गीतों, लोक संगीत को मुकाम मिलना बाकी है। ताजमहल की शान में कसीदे पढ़ते हुए उन्होंने कहा कि वे आगरा कई बार आए हैं और ताजमहल देखा, पर हर बार यह खास लगता है।
कथक ही इनकी जिंदगी
ताज महोत्सव में स्विट्जरलैंड से कथक नृत्य की प्रस्तुति देने आईं फैनी मारक्वेट और प्रसिला ब्रूवेलहार्ट के लिए कथक ही जिंदगी है। उन्होंने स्विट्जरलैंड में कथक को आगे बढ़ाया। बुधवार शाम को मंच पर गोपाल मिश्रा ने सुगम संगीत, अरविंद मैसी और संतोष मैसी ने सितार और तबला वादन किया। अनुभव सिकंदर ने गायन और सौम्या ने सुगम संगीत पेश किया। सरदार जसवंत सिंह ने पंजाबी गीतों के जोश से समां बांधा। निमिषा सिंघल ने माहौल बदलते हुए गजल की प्रस्तुति दी। इलाहाबाद से आई पायल बनौधा ने तबला, ढोलक और उसके बाद फैनी तथा प्रसिला ने कथक नृत्य पेश किया।