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90 के दशक से जिले की राजनीति में धुरी बन गए थे मुलायम

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कासगंज में जनसभा के बाद अपनी गाड़ी से वापस जाते सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव। फाइल फोटो - फोटो : KASGANJ
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कासगंज। नेताजी मुलायम सिंह यादव नहीं रहे। जिले की राजनीति में उनके सियासी दांव हमेशा चर्चा में रहे हैं। 1990 के दशक से मुलायम सिंह यादव का जिले की राजनीति में दखल बढ़ा था। वह राजनीति के केंद्र में आ गए। वर्ष 1996 में समाजवादी पार्टी ने पटियाली विधानसभा सीट पर पहला चुनाव जीता। इस चुनाव में देवेंद्र सिंह यादव विधायक चुने गए। इसके बाद से समाजवादी पार्टी लगातार जिले में मुख्य मुकाबले में बनी रही।
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वर्ष 1999 में कांग्रेस के पूर्व मंत्री मानपाल सिंह मुलायम सिंह से प्रेरित होकर समाजवादी पार्टी में आए। उन्होंने वर्ष 2002 में चुनाव लड़ा। इसमें जीत हासिल की। जिले में मुलायम सिंह का प्रभाव धीरे धीरे बढ़ता गया। जिले के तराई इलाके के मतदाताओं पर उनका खासा प्रभाव था। उनकी एक जनसभा के बाद बाजी पलट जाती थी। वर्ष 2002 के सदर विधानसभा क्षेत्र के चुनाव में मुलायम सिंह की चुनाव रैली के बाद समीकरण बदल गया था। चुनाव में सपा प्रत्याशी मानपाल सिंह की जीत हुई थी। 2012 में सपा ने जिले की दो सीटें जीतीं।
पहले कासगंज का क्षेत्र बदायूं लोकसभा सीट से जुड़ा था। उस दौर में सपा प्रत्याशी के रूप में सलीम इकबाल शेरवानी चुनाव जीते थे। वह तीसरे मोर्चे की सरकार में भारत सरकार के प्रदेश राज्य मंत्री बने। वर्ष 2017 में सपा को कोई सीट नहीं मिली। हर सीट पर सपा मुकाबले में रही। वर्ष 2022 के चुनाव में भी भाजपा की लहर के बीच पटियाली विधानसभा की सीट पर सपा ने जीत हासिल की। मुलायम सिंह का जिले की राजनीति में हमेशा हस्तक्षेप रहा। यहां के नेता उनकी बात पूरी तरह मानते थे। पूर्व मंत्री मानपाल सिंह ने बताया कि नेताजी का व्यक्तित्व ऐसा था कि लोग उनके दीवाने हो जाते थे। जिले की राजनीति की चुनौतियों के बावजूद उन्होंने यहां सफलता पाई।
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