मदर्स डे पर दुनिया भर में मां को याद किया जा रहा है। बच्चे मां को उपहार भेंट करेंगे, लेकिन वृंदावन के महिला आश्रय सदनों में रहने वाली मांओं को कोई उपहार भेंट नहीं करेगा। उनके लिए तो आश्रय सदन ही उनका घर और परिवार बन गया है।
नौ महीनों तक जिसे अपनी कोख में रखा उसने ही आज मुंह मोड़ लिया। भरा पूरा परिवार है, लेकिन कोई अपना कहने वाला नहीं। उम्र का अंतिम पड़ाव है और अपनों को बूढ़ी पथराई आंखें खोज रहीं हैं, लेकिन दूर दूर तक कोई अपना कहने वाला नहीं।
अब एक ही इच्छा मन में है कि आगे का समय ठाकुर बांके बिहारी के चरणों में बीते। मोक्ष की कामना लिए वृंदावन के आश्रय सदनों में रह रहीं माताओं की आप बीती सुनाते-सुनाते आंखें भर आतीं हैं।