आगरा के इंजीनियर दीपक मखीजा की पुडुचेरी में हादसे में मौत हो गई। वह दोस्तों के साथ नए साल का जश्न मनाने गए थे। अचानक समुद्र की लहरों के बीच वह फंस गए और डूबने से उनकी मौत हो गई।
"बेटा दीपक मखीजा पढ़ाई में अव्वल था। कम उम्र में ही बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी पा ली थी। 31 दिसंबर, 2021 को उसने अपनी पहली नौकरी की खबर दी तो परिवार खुशी में डूब गया था। इसके एक साल बाद 31 दिसंबर, 2022 को मौत की खबर ने परिवार को जीवन भर का गम दे दिया।"
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यह कहते हुए मां सीमा फफक पड़ीं। लोगों ने उनको संभाला। पिता किसी तरह खुद को संभाले हुए थे। ढांढस बंधा रहे लोग बोल रहे थे कि जाते-जाते घर के दीपक को बुझा गया पुराना साल।
आवास विकास कॉलोनी, सेक्टर-4 निवासी तुलसीराम मखीजा का संयुक्त परिवार है। उनसे बड़े भाई नानकराम और छोटे किशनलाल हैं। राजामंडी रेलवे स्टेशन मार्ग पर उनका ढाबा है। तुलसीराम के 3 बेटों में दीपक बड़े थे। छोटे विक्की और जय पढ़ाई कर रहे हैं। मां सीमा के मुताबिक, बेटे दीपक ने कोटा से इंजीनियरिंग की तैयारी की थी। जालंधर के कॉलेज से बीटेक किया। उसकी नौकरी 31 दिसंबर, 2021 को लगी थी। बेटे ने सबसे पहले उन्हें ही नौकरी के बारे में बताया। बेंगलुरु में नौकरी लगने के बाद दीपक एक ही बार घर आया था। रोजाना उनसे फोन पर बात जरूर करता था।
दोस्तों के साथ बाइकों पर निकला था
नए साल का जश्न मनाने के लिए 31 दिसंबर, 2022 को वह अपने 6 दोस्तों के साथ बाइकों पर निकला था। तब भी उनको फोन करके जानकारी दी थी। बताया था कि वह पुुडुचेरी पहुंच गया है। अब समुद्र किनारे जा रहा है। शाम को 5 बजे दोस्तों ने फोन करके परिवार को हादसे के बारे में बताया। पुडुचेरी से शव लेने के लिए परिजन पहुंच गए हैं। उनके आगरा आने का इंतजार किया जा रहा है। घर पर रिश्तेदार रविवार सुबह से ही पहुंचने लगे थे।
ताऊ नानक राम ने बताया कि दीपक लहरों में फंसकर बहने लगा था। मदद के लिए गुहार लगा रहा था। किनारे पर खड़े दोस्त समझ नहीं पाए। उन्हें लगा कि दीपक मजाक कर रहा है। जब वह बाहर नहीं आया तब दोस्त दौड़े, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। घटना का वीडियो भी सामने आया है। इसमें दोस्त कह रहा है कि नाटक तो नहीं कर रहा। बाद में कहता है कि अरे-अरे गया।
मां ने रखा था बेटे की सलामती के लिए व्रत
परिजनों ने मां सीमा को बेटे की मौत के बारे में नहीं बताया था। हादसे की जानकारी पर मां ने बेटे की सलामती के लिए व्रत रखा। वह प्रार्थना करती रही कि बेटा सकुशल लौट आए। मां कहती रही कि एक बार बेटा वापस लौट आए। उसने घर आने का वादा भी किया था। रविवार दोपहर को परिवार को शव मिलने के बारे में बताया गया। मां को जानकारी हुई तो जैसे उसका कलेजा फट पड़ा। रोते-रोते हालत बिगड़ने लगी। उन्हें परिजन और रिश्तेदारों ने किसी तरह संभाला। दादा गोपालदास, दादी चंद्रा देवी भी फूट-फूटकर रो रहे थे।