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मदर डेयरी पर दर्ज होगा मुकदमा

Sun, 21 Jun 2015 02:25 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
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 मदर डेयरी के कलेक्शन सेंटर के दूध के सैंपल में डिटरजेंट मिलने के बाद एफडीए अधिकारियों ने मुकदमा दर्ज कराने के लिए खाद्य सुरक्षा कमिश्नर को रिपोर्ट भेजी है।
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गौरतलब है कि नवंबर 2014 में टीम ने बाह क्षेत्र में स्थिति मदर डेयरी के कलेक्शन सेंटर से दूध के सैंपल लिए थे। लखनऊ लैब में नमूने अधोमानक पाए गए। इस रिपोर्ट को मदर डेयरी ने चुनौती दी और कोलकाता लैब में जांच कराई। कोलकाता लैब में एक सैंपल अधोमानक पाया गया था और एक में डिटरजेंट की मिलावट पाई गई थी। हालांकि मदर डेयरी की ओर से इसका खंडन करते हुए कहा गया था कि सैंपल गांव स्तर के कलेक्शन सेंटर के लिए गए थे। प्लांट में कई स्तर पर जांच की जाती है और खराब दूध को हटा दिया जाता है। एफडीए के अधिकारियों का कहना है कि दूध के सैंपल डेयरी के टैंकर से लिए गए थे। अभिहीत अधिकारी राम नरेश यादव ने बताया कि कलेक्शन सेंटर का लाइसेंस रद कर दिया गया है। अब मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
इनबाक्स...
हो सकता है आजीवन कारावास
एफडीए अधिकारियों का कहना है कि सैंपल अधोमानक पाए जाने पर जुर्माने की कार्यवाही की जाती है। इसके लिए अभिहीत अधिकारी की संस्तुति के बाद नामित प्रशासनिक मजिस्ट्रेट जुर्माना कर सकते हैं। आगरा में एडीएम सिटी को यह अधिकार है। जिन मामलाें में सजा का प्रावधान है वहां कमिश्नर की स्वीकृति के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 59 के तहत मुकदमा दर्ज कराया जाता है। ऐसे मामलों में छह वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा प्रावधान है।
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मैगी नूडल्स की नहीं आई रिपोर्ट
मैगी नूडल्स के मामलों में अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है। सामान्यत: सैंपल भेजने के बाद 14 दिन में रिपोर्ट आने की संभावना रहती है। मैगी प्रकरण में एक माह बीतने को है। एफडीए के अफसरों का कहना है कि आगरा से सैंपल मेरठ लैब में भेजे जाते हैं। हाईप्रोफाइल मामला होने के चलते इस बार सैंपल लखनऊ भेजे गए थे, लेकिन लखनऊ लैब में उचित संसाधन न होने के चलते सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरआई) से जांच कराई जा रही है। इसके चलते कुछ देरी हो रही है।
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