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शहर के आधे से ज्यादा नाले सीधे गिर रहे यमुना में

Wed, 27 May 2015 06:14 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
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यमुना नदी को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए करोड़ रुपये पानी की तरह बहाया गया, लेकिन स्थिति नहीं सुधरी। जिम्मेदार विभाग ही आंखें मूंदकर बैठ गए। नतीजा, कालिंदी का कैंसर बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की बैठक में चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। शहर के आधे से अधिक नाले अभी सीधे यमुना में गिर रहे हैं।
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समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि शहर में ऐसे 50 नाले हैं जो यमुना की ओर जाते हैं। इनमें से 20 नालों को यमुना एक्शन प्लान फेज एक और दो के तहत जल निगम ने टेप किए हैं। राज्य सेक्टर और जेनर्म कार्यक्रम के तहत दो नाले टेप हुए हैं। बाकी 26 छोटे, बड़े नाले अभी सीधे यमुना में गिर रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक शहर में प्रतिदिन तकरीबन 250 एमएलडी सीवेज निकलता है। इसके शोधन के लिए 9 ट्रीटमेंट प्लांट हैं। जिनमें करीब 180 एमएलडी सीवेज ट्रीट होता है। शेष 70 एमएलडी अनट्रीटेड सीवेज नदी को दूषित कर रहा है। सीवेज पंपिंग स्टेशन 21 बना तो दिए गए हैं, लेकिन केवल 12 विद्युत सब स्टेशन बने हैं। यहां भी विद्युत कटौती की समस्या है। शेष नौ पर अभी तक विद्युत सब स्टेशन ही नहीं बनाए गए हैं। जिलाधिकारी पंकज कुमार ने एसटीपी और पंपिंग स्टेशनों को विद्युत कटौती से मुक्त रखने के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जल निगम के अधिकारियों को दुबारा सर्वे कर एसटीपी की शोधन क्षमता, उपयोगिता, संचालन की गुणवत्ता, शोधित सीवेज निस्तारण, पंपिंग स्टेशनों और नालों का भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। टोरंट पावर को अबाध विद्युत आपूर्ति के लिए कहा गया है। 
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