गुरू पूर्णिमा पर चांद की चांदनी में चमकते-दमकते ताज का दीदार कर सैलानियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। नाइट व्यू के लिए पहली बार पहुंचे पर्यटकों के लिए तो यह बेहद दुर्लभ नजारा था। बेपनाह हुस्न की बेजोड़ निशानी को चांदनी से लिपटे देखा तो पलक झपकाए बगैर निहारते ही रह गए। संगमरमरी शाहकार पर लगे रंग-बिरंगे पत्थर टिमटिमा रहे थे।
कुल 172 सैलानियों ने ताज का नाइट व्यू किया। पहले दो बैच का मजा बादलों ने किरकिरा कर दिया था। कभी चांद बदली के आगोश में होता, तो कभी मुखड़ा दिखा देता। रोशनी कम थी। मानो बादलों में लुकाछिपी खेल रहा था चांद।
ताजमहल पर सैलानियों की टकटकी लगी थी। मगर नाइट व्यू से मन पूरी तरह प्रसन्न नहीं हो रहा था। इसके बाद मौसम मेहरबान हुआ। बादल छंट गए। चांद पूरी तरह खिल गया। धवल चांदनी में ताज का दीदार एकदम साफ होने लगा। ऐसे लगा मानों ताज, चांदनी से लिपट गया हो। पर्यटकों ने ठंडी हवाओं के बीच खूबसूरती को निहारा। आंखों के रास्ते हर दिलकश नजारा दिल में उतरता चला गया। ताजगंज के होटलों की छतों पर भी लोग रहे। इनकी नजर भी ताजमहल पर अटकी थी।