हाल ही में वृंदावन में कई बंदर मरे तो सवाल उठा कि एक के बाद एक बंदरों की मौत कैसे हो रही है? क्या कोई इनकी जान ले रहा है? यकीन नहीं हुआ कि कोई बेजुबान जानवरों को भी मार सकता है। लेकिन आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला के विसरा सेक्शन की रिपोर्ट बताती है कि ऐसा हो रहा है? बंदरों की जान ली जा रही है।
बंदरों को आटे की लोई के अंदर चूहे मारने की दवा दी जा रही है। इसे खाते ही उनकी जान चली जाती है। इतना ही नहीं। फसलों को बचाने के लिए कुछ लोग राष्ट्रीय पक्षी मोर और गाय को भी जहर दे रहे हैं। इसका पता लैब में आए जीव जंतुओं के विसरा परीक्षण की रिपोर्ट देखने से चलता है। हर महीने कम से कम दस विसरा गाय, मोर और बंदरों के आ रहे हैं।
इनमें 80 फीसदी से ज्यादा में मौत का कारण जहर पाया जा रहा है। मथुरा से हाल ही में बंदरों से विसरा आए हैं परीक्षण के लिए। इससे पूर्व मथुरा, एटा और कासगंज से विसरा आ चुके हैं। इनका परीक्षण किया गया तो जहर मिला।