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वृंदावन में हो रही बंदरों की मौत पर बड़ा खुलासा, विसरा रिपोर्ट में सामने आई यह वजह

Sun, 12 May 2019 02:18 PM IST
मुकेश कुमार चंद्रमोहन शर्मा, अमर उजाला, आगरा
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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हाल ही में वृंदावन में कई बंदर मरे तो सवाल उठा कि एक के बाद एक बंदरों की मौत कैसे हो रही है? क्या कोई इनकी जान ले रहा है? यकीन नहीं हुआ कि कोई बेजुबान जानवरों को भी मार सकता है। लेकिन आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला के विसरा सेक्शन की रिपोर्ट बताती है कि ऐसा हो रहा है? बंदरों की जान ली जा रही है। 
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बंदरों को आटे की लोई के अंदर चूहे मारने की दवा दी जा रही है। इसे खाते ही उनकी जान चली जाती है। इतना ही नहीं। फसलों को बचाने के लिए कुछ लोग राष्ट्रीय पक्षी मोर और गाय को भी जहर दे रहे हैं। इसका पता लैब में आए जीव जंतुओं के विसरा परीक्षण की रिपोर्ट देखने से चलता है। हर महीने कम से कम दस विसरा गाय, मोर और बंदरों के आ रहे हैं।

इनमें 80 फीसदी से ज्यादा में मौत का कारण जहर पाया जा रहा है। मथुरा से हाल ही में बंदरों से विसरा आए हैं परीक्षण के लिए। इससे पूर्व मथुरा, एटा और कासगंज से विसरा आ चुके हैं। इनका परीक्षण किया गया तो जहर मिला। 
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जहर और गाय के विसरा में भी मिला जहर

लैब के वैज्ञानिकों ने बताया कि बंदरों की आंत में चूहे मारने की दवाई और आटा पाया गया। मोर और गाय के विसरा में भी जहर मिला है लेकिन यह चूहे मारने की दवाई नहीं थी। गायों को ज्यादा खतरनाक जहर खाने की चीजों में मिलाकर दिया।

मोर को मारने के लिए अनाज के दानों में पेस्टीसाइड मिलाकर खिलाया गया था। विसरा जांच में इसका पता चला। ये विसरा खेतों में मिले शव के पोस्टमार्टम के बाद भेजे गए थे। पोस्टमार्टम में मौत का कारण स्पष्ट नहीं था। 

खेत में मिले शव से माना जा रहा है कि मोरों को फसल में होने वाले नुकसान से बचने के लिए कुछ लोग ऐसा कर रहे हैं। गाय और भैंस को जहर देकर मारे जाने के मामले पुलिस में भी आ चुके हैं।

खुलासा हो चुका है कि कुछ लोग खाल के लालच में ऐसा करते हैं। कई जगह दुश्मनी निकालने के लिए पशुओं को जहर दिया जाता है। पीड़ित किसान मृत पशुओं का पोस्टमार्टम और विसरा जांच इसलिए कराते हैं, क्योंकि इसके आधार पर ही मुआवजा राशि मिलती है। मोर का पोस्टमार्टम वन विभाग कराता है।
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