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Agra News: रोके जाएं मनरेगा कार्य नहीं तो फसल हो जाएगी बर्बाद-ग्रामीण

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गंजडुंडवारा। कादरगंज देहात क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित 20 से अधिक गांव में मनरेगा के अंतर्गत हो रहे चकरोड नाले-नाली निर्माण कार्य किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। किसानों ने डीएम से मांग की है कि उनकी फसल कटने के बाद इन कार्यों को करवाया जाए। तब तक यह कार्य रुकवा दिए जाएं।
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कादरगंज क्षेत्र में नवाबगंज नगरिया, बगवास, सुल्तानपुर, समसपुर, नगला दामर, रसूलपुर, लालूपुर, सिकंदरपुर वैश्य, कादरगंज गढ़ी, इंदा जसनपुर, मिहौला, प्रीतम नगर, भगोरा, असद गढ़, किला वरौना आदि में अगस्त-सितंबर में गंगा में आई बाढ़ के पानी ने तांडव मचाया। इससे किसानों की फसल बर्बाद हुई और उन्हें खुद शिविरों में शरण लेनी पड़ी। बगवास के किसान शंकरलाल और राजपाल का कहना है कि उन्होंने 10 बीघा बाजरा-मक्का, उर्द की फसल लगाई। वह बाढ़ के पानी से खराब हो गई। अब गेहूं, आलू की फसल उग कर तैयार हो रही है। मगर मनरेगा कार्यों से उनकी फसल उजड़ रही है। चकरोड और नालियां बनाने के लिए खेतों से मिट्टी ली जा रही है। इससे फसलें खराब हो रहीं हैं। नवाबगंज नगरिया के अवधेश ऋषि पाल सोनपाल भगत का कहना है कि रबी की फसल मनरेगा के कार्य से उजड़ रही है। फसल कटने के बाद यह कार्य कराया जाए। हडोरा निवासी किसान नेता वीरेश का कहना है किसानों की फसलें बर्बाद न की जाएं, खेत खाली होने के बाद चकररोड नाला आदि कार्य कराया जाए। फिलहाल कार्य पर रोक लगाई जाए, जिससे किसानों को कम से कम एक फसल मिल सके। इन सभी लोगों ने डीएम से फिलहाल मनरेगा कार्य रुकवाने की मांग की है।
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