दूध, घी, पनीर, खोआ समेत अन्य खाद्य सामग्री को हम चाव से खा रहे हैं। मिलावट-नकली के चलते ये लोगों को बीमार बना रही हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की जांच में 62 फीसदी नमूने फेल मिले हैं। दूध-घी नकली, खोआ में स्टार्च मिला है। 114 नमूने तो सेहत के लिए खतरनाक बताए गए हैं।
सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय शशांक त्रिपाठी ने बताया कि बीते वित्तीय साल में 1180 नमूने जांच के लिए लैब भेजे थे। इनमें 455 फेल मिले हैं। 114 असुरक्षित मिले हैं, जो सेहत के लिए खतरनाक हैं। इसमें दूध, घी नकली मिले। पनीर सिंथेटिक पाया। खोआ में स्टार्च-पाउडर की पुष्टि हुई। मसालों में केमिकल और सिंथेटिक रंग पाया गया। सरसों का तेल, रिफाइंड भी मिलावटी मिला। नमकीन में घुनी-खराब मूंगफली पाई गई। नमूने फेल होने के बाद केस दर्ज कराया। कोर्ट ने 4.38 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
प्रारंभिक तौर पर मिलावट ऐसे पहचानें:
दूध : एक घूंट पीएं और कुल्ला कर दें, शुरू में मीठा और बाद में कसैला लगे तो नकली होगा।
घी : हाथों पर रगड़ने पर खुशबू आएगी, कुछ देर बाद खत्म हो जाएगी। स्वाद भी बदला होगा।
मिर्च, हल्दी-धनिया : पानी में मसाले डालने पर पानी का रंग लाल, पीला, हरा हो जाएगा।
पनीर : शुद्ध होने पर सफेद होगा। सिंथेटिक होने पर हल्का मटमैला और कठोर होगा।
खोआ : इसमें आयोडीन सॉल्यूशन की एक-दो बूंद मिलाने पर इसका रंग नीला हो जाएगा।
(जैसा कि मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेश गुप्ता ने बताया)
किडनी-पेट रोग की बढ़ रही हैं बीमारियां
सीएमओ डाॅ. अरुण श्रीवास्तव का कहना है कि मिलावटी-नकली खाद्य सामग्री के कारण पेट रोग, किडनी-लिवर की बीमारियां बढ़ रही हैं। खासतौर से बच्चों को अधिक खतरा है। लंबे समय तक इनके उपयोग से कैंसर का खतरा भी बढ़ रहा है।
मिलावट की यहां करें शिकायत : 18001805533
1180 : नमूने जांच के लिए भेजे।
734 : नमूनों की रिपोर्ट आई।
455 : नमूने मिले फेल
308 : घटिया मिले
114 : असुरक्षित मिले