कासगंज। लॉकडाउन में विद्यालयों के बंद होने के कारण अब सरकार बच्चों के मध्याह्न भोजन का खाद्यान एवं भोजन बनाने में आने वाली कुकिंग लागत का धन उनके अभिभावकों को देगी। शासन के इस निर्णय से जिले के 1 लाख 54 हजार 992 बच्चों को लाभ मिलेगा। विभाग ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
शासन से बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक विद्यालयों, सहायता प्राप्त विद्यालयों, माध्यमिक शिक्षा परिषद के शासकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों के कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों के लिए मध्याह्न योजना का संचालन किया जा रहा है। बच्चों को स्कूल खुलने पर विद्यालयों में ही मेन्यू के आधार पर पका हुआ भोजन दिया जाता है। 24 मार्च से विद्यालय बंद होने से बच्चों को योजना का लाभ नहीं मिल रहा।
सरकार 30 जून तक का खाद्यान एवं पकाने में खर्च होने वाला धान अब बच्चों के अभिभावकों को देगी। शासन ने इस अवधि के स्कूल कार्य दिवस के 76 दिन के मानक का निर्धारण किया है। जिसके आधार पर प्राथमिक स्तर के बच्चों के लिए 7.600 किलो ग्राम खाद्यान व 374 रुपये कुकिंग लागत, उच्च प्राथमिक स्तर के लिए 11.420 किग्रा खाद्यान एवं 561 रुपये कुकिंग लागत दी जाएगी।
शासन से निर्धारित की गई नई लागत
शासन ने विद्यालयों में बनने वाले मध्याह्न भोजन की एक अप्रैल से नई लागत निर्धारित कर दी है। प्राथमिक स्तर पर लागत को 4.48 रुपये से बढ़ाकर 4.97 रुपये किया है। उच्च प्राथमिक स्तर के लिए लागत 6.71 रुपये से बढ़ाकर 7.45 रुपये की गई है। मार्च माह के शेष दिन का पुरानी लागत से तथा 1 अप्रैल के बाद से नई लागत से धन अभिभावक के खाते में भेजा जाएगा। इसी तरह प्राथमिक स्तर पर 100 ग्राम प्रतिदिन तथा उच्च प्राथमिक स्तर पर 150 ग्राम प्रतिदिन के मानक पर निर्धारित दिनों का खाद्यान मिलेगा।
प्रधानाध्यापक कराएंगे खाद्यान्न का वितरण
बच्चों को खाद्यान्न का वितरण कराने की जिम्मेदारी विद्यालय के प्रधानाचार्य की होगी। प्रधानाचार्य एक निर्धारित प्रारूप पर छात्र का नाम, कक्षा, खाद्यान्न की मात्रा विद्यालय में दर्ज पंजीयन संख्या को अंकित करेंगे। छात्र छात्राओं को विद्यालय में बुलाकर खाद्यान्न का वितरण करेंगी।
आकड़े एक नजर में
बेसिक शिक्षा परिषद के बच्चे 144830
माध्यमिक विद्यालयों के बच्चे 10162
शासन से लॉक डाउन की अवधि का राशन व बनाने का खर्च बच्चों के अभिभावकों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए है। धन अभिभावकों के खाते में भेजा जाएगा। जबकि खाद्यान्न विद्यालय से उपलब्ध होगा। वितरण में सोशल डिस्टेसिंग का ध्यान रखा जाएगा।- अंजली अग्रवाल बेसिक शिक्षा अधिकारी